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Gulmohur StartUp Studio की अनूठी पहल: ‘कचरे से कारीगरी’ कर छात्रों ने बनाए 100 से अधिक उपहार


जमशेदपुर। इस शिक्षक दिवस पर गुलमोहर हाई स्कूल में उपहारों की कीमत नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी मेहनत, सृजनशीलता और बच्चों का स्नेह सबसे अनमोल था। विद्यालय के Gulmohur StartUp Studio के छात्र उद्यम ‘Gulmohur Rejuven’ के विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के लिए 100 से अधिक खूबसूरत हस्तनिर्मित ईयररिंग्स और की-रिंग्स तैयार कर शिक्षक दिवस को यादगार बना दिया।

इस पहल की सबसे खास बात रही ‘वेस्ट से बेस्ट’ की सोच। विद्यार्थियों ने क्रोशिया, क्ले, बचे हुए कपड़ों की कतरनों तथा अन्य अनुपयोगी एवं पुनः इस्तेमाल योग्य सामग्रियों को अपनी कल्पनाशीलता से आकर्षक उत्पादों में बदल दिया। जो सामग्री सामान्यतः बेकार समझकर फेंक दी जाती, वही बच्चों के हुनर से शिक्षकों के लिए स्नेह से भरे खूबसूरत उपहारों में बदल गई।

महज 15 दिनों में विद्यार्थियों ने 100 से अधिक उत्पाद तैयार किए। शिक्षक मेंटर्स मेघा और सुदेश के मार्गदर्शन में बच्चों ने आइडिया और डिजाइन से लेकर सामग्री के चयन, निर्माण और फिनिशिंग तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की।

विद्यार्थियों के हाथों से बने उपहार पाकर शिक्षक बेहद प्रसन्न और भावुक हुए। उनके लिए इन उपहारों का महत्व उनकी कीमत में नहीं, बल्कि इस बात में था कि बच्चों ने अपने समय, मेहनत और स्नेह से उन्हें स्वयं तैयार किया था।

यह Gulmohur Rejuven का दूसरा प्रोडक्शन है। इससे पहले विद्यार्थियों ने रक्षाबंधन के अवसर पर हस्तनिर्मित राखियां तैयार की थीं। इन दोनों प्रयासों के माध्यम से विद्यार्थी केवल उत्पाद बनाना ही नहीं, बल्कि उद्यमिता, रचनात्मकता, टीमवर्क, समय प्रबंधन, समस्या समाधान, संसाधनों के सदुपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी जैसे महत्वपूर्ण कौशल भी व्यवहार में सीख रहे हैं।

विद्यालय की प्राचार्या प्रीति सिन्हा ने कहा, “मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि केवल 100 से अधिक उत्पादों का तैयार होना नहीं, बल्कि हर उत्पाद के पीछे हुई सीख है। जब बच्चे बेकार समझी जाने वाली सामग्री में भी एक नए उत्पाद की संभावना देखते हैं, तब वे नवाचार, उद्यमिता और सतत विकास को किताबों से नहीं, अपने अनुभव से सीखते हैं। Gulmohur StartUp Studio के माध्यम से हमारा प्रयास है कि बच्चे केवल ज्ञान के उपभोक्ता न बनें, बल्कि विचारों, उत्पादों और समाधानों के सृजक बनें।”

शिक्षक दिवस पर Gulmohur StartUp Studio की यह पहल एक खूबसूरत संदेश दे गई—सही सोच और सृजनशीलता से ‘वेस्ट’ भी मूल्यवान बन सकता है और जब उसमें गुरु के प्रति सम्मान जुड़ जाए, तो वही रचना अनमोल उपहार बन जाती है।