रांची एक्सप्रेस संवाददाता
मधुपुर बाजार (देवघर) : शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केन्द्र में भारत छोड़ो आन्दोलन दिवस व प्रख्यात साहित्यकार भीष्म साहनी की जयंती मनायी गई. मौके पर उपस्थित लोगों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये. जलेस के प्रांतीय सह सचिव, कलमकार धनंजय प्रसाद ने कहा कि आज से 84 वर्ष पूर्व राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आन्दोलन का आह्वान करो और मरो, के रुप में किया था, जो स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा और उर्जा प्रदान की थी. मौजूदा समय में भी देश आन्दोलनरत है, अपने हक और अधिकारों की लड़ाई छात्र व नौजवान लड़ रहा है. उन्होंने कहा कि लेखक आवाम की अनुभूतियों का आईना होता है और अपनी जगह से वह हमेशा सच का रास्ता दिखाता है. साथ ही उन ताकतों को बेनकाब करता है, जो इस दुनियां को बेनूर और बदसूरत बनाने पे तुले हुए हैं. भीष्म साहनी ऐसे ही लेखक थे. वो बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व के धनी थे, वो साहित्यकार, लेखक, उपन्यासकार, नाटककार, अभिनेता, अनुवादक व शिक्षक थे. उन्होंने बहुचर्चित उपन्यास तमस, हानुस जैसा नाटक, वांगचुक, अमृतसर आ गया, चीफ की दावत जैसी कहानियां लिखा. उन्होंने तमस उपन्यास में भारत विभाजन की त्रासद घटनाओं का सजीव चित्रण सरल भाषा में किया है , जिसे काफी ख्याति मिली. उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में लेखकों की भूमिका आम जनों को ज्यादा सचेत करने की है और भटके हुए लोगों को राहत दिखाने की है. क्योंकि इस दुनियां में हमेशा से ही साहित्य व कलमकारों ने मार्गदर्शन कराने का काम किया है. इसलिए समाज व व्यवस्था की बेहतरी चाहने वाले लेखक , कलमकार, पत्रकार व बुद्धिजीवी को एकजुट होकर सामने आना होगा और एक से बेहतर समाज व व्यवस्था का निर्माण करना होगा. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये.






