अमरावती: आंध्र प्रदेश में इस साल कमजोर मानसून ने खेती और जल उपलब्धता को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है। राज्य सरकार ने 26 में से 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इनमें 283 मंडलों को गंभीर और 105 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। सरकार के मुताबिक, जून से अगस्त 2026 के दौरान राज्य में सामान्य से 53.4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इस अवधि में औसत वर्षा केवल 197.6 मिलीमीटर रही, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 424.3 मिलीमीटर होना चाहिए था। इसी गंभीर कमी को देखते हुए राज्य ने सामान्य समय से पहले सूखे की घोषणा की। सरकार के आकलन में मौसम संबंधी परिस्थितियों के साथ El Niño के प्रभाव को भी एक महत्वपूर्ण कारक माना गया है। सूखे का असर विशेष रूप से उन इलाकों में दिखाई दे रहा है जहां खेती मानसूनी बारिश पर काफी निर्भर रहती है। सूखे का प्रभाव राज्य के रायलसीमा क्षेत्र में अपेक्षाकृत ज्यादा बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, 388 प्रभावित मंडलों में से 186 मंडल रायलसीमा क्षेत्र में हैं। गंभीर सूखे की श्रेणी वाले 283 मंडलों में से 159 भी इसी क्षेत्र में आते हैं। कम बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी, सिंचाई की समस्या और फसलों की शुरुआती वृद्धि पर दबाव जैसी स्थितियां सामने आई हैं। धान, मूंगफली, मक्का और कपास जैसी फसलों पर भी मौसम की कमी का असर पड़ने की चिंता जताई गई है। सरकारी आदेश के अनुसार सूखा प्रभावित जिलों में श्रीकाकुलम, विजयनगरम, विशाखापत्तनम, अनकापल्ली, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, एलुरु, कृष्णा, एनटीआर, गुंटूर, बापटला, पलनाडु, प्रकाशम, मार्कापुरम, कुरनूल, नंद्याल, अनंतपुरमु, श्री सत्य साई, वाईएसआर कडप्पा, अन्नमय्या और चित्तूर शामिल हैं। आमतौर पर खरीफ सीजन के सूखे की घोषणा की प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक पूरी की जाती है। लेकिन इस बार बारिश की स्थिति और अन्य सूचकांकों को देखते हुए राज्य सरकार ने 1 अक्टूबर को ही आदेश जारी कर दिया। इससे प्रभावित किसानों के लिए राहत और सहायता से जुड़े कदम जल्द शुरू किए जा सकेंगे। सूखे का आकलन केवल बारिश के आंकड़ों के आधार पर नहीं किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, फसल क्षेत्र, वनस्पति की स्थिति, मिट्टी में नमी, जलाशयों और भूजल जैसे कई संकेतकों को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया। सूखा घोषित होने के बाद प्रभावित इलाकों के किसानों को कृषि ऋण से जुड़ी राहत, कर्ज पुनर्गठन, इनपुट सब्सिडी और आपदा राहत सहायता जैसी व्यवस्थाओं का लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। इसके लिए संबंधित जिलों में आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की जानी है। राज्य सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक बारिश की कमी रहने पर खेती के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पेयजल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, विपक्षी YSR कांग्रेस ने सरकार के सूखा आकलन और घोषणा को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि कई इलाकों में हालात पहले ही गंभीर हो चुके थे और सरकार ने घोषणा में देरी की। विपक्ष ने नेल्लोर जिले को सूची में शामिल नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार के आधिकारिक आकलन से अलग हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सूखे की समस्या से निपटने के लिए बड़े जल संसाधन प्रोजेक्ट्स पर जोर दिया है। उन्होंने गोदावरी और कावेरी नदी प्रणालियों को जोड़ने की जरूरत का उल्लेख करते हुए कहा है कि अतिरिक्त बाढ़ के पानी का बेहतर इस्तेमाल दक्षिणी राज्यों में जल संकट कम करने में मदद कर सकता है। आंध्र प्रदेश में 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाना इस साल कमजोर मानसून की गंभीर तस्वीर सामने रखता है। 53.4 प्रतिशत बारिश की कमी ने खासकर खेती पर दबाव बढ़ाया है। अब चुनौती यह होगी कि प्रभावित किसानों तक राहत, ऋण सहायता और कृषि सहयोग कितनी तेजी से पहुंचता है और आने वाले महीनों में जल संकट को कैसे नियंत्रित किया जाता है।बारिश में भारी कमी बनी मुख्य वजह
रायलसीमा पर सबसे ज्यादा दबाव
किन जिलों में घोषित हुआ सूखा?
सरकार ने समय से पहले लिया फैसला
किसानों के लिए राहत का रास्ता खुलेगा
विपक्ष ने उठाए सवाल
दीर्घकालिक समाधान पर भी जोर
निष्कर्ष



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