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शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स 668 अंक टूटा; निफ्टी भी दबाव में


मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली। दोपहर के समय सेंसेक्स करीब 668 अंक टूटकर 71,970.69 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 245.70 अंक गिरकर 22,357.35 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाद के कारोबार में भी दबाव बना रहा और सेंसेक्स की गिरावट 900 अंक से अधिक तक पहुंच गई।

बाजार पर कई दबाव एक साथ

गुरुवार की गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों के संकेतों का असर दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और एशियाई बाजारों के कमजोर रुख पर रही।

इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद बाजार में ब्याज दरों को लेकर भी सतर्कता बढ़ी है। RBI ने रेपो रेट को 5.50 फीसदी किया है और अपनी नीति का रुख “calibrated tightening” की ओर बदला है।

निफ्टी के ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में

बाजार में गिरावट का असर व्यापक रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 14 में कमजोरी देखने को मिली। खास तौर पर कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

दोपहर के कारोबार में ITC, Adani Ports, IndiGo, Power Grid और Reliance Industries जैसे शेयरों में कमजोरी देखी गई। दूसरी तरफ Titan, Tech Mahindra, TCS, Infosys और HCL Technologies जैसे कुछ शेयरों में खरीदारी बनी रही।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का कारण

बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली भी एक महत्वपूर्ण दबाव है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹6,121 करोड़ की निकासी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹4,596 करोड़ की खरीदारी की।

विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बनी हुई हो।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर नजर

बाजार के लिए एक और चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 101–102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। मध्य पूर्व में आपूर्ति और शिपिंग से जुड़ी चिंताओं के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि बाजार में तेल की कीमतों पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।

IT शेयरों ने दिखाई कुछ मजबूती

पूरे बाजार में गिरावट के बावजूद IT सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत नजर आया। TCS, Infosys और Tech Mahindra जैसे शेयरों में खरीदारी देखी गई। सितंबर तिमाही के नतीजों का सीजन भी शुरू हो चुका है और निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं।

TCS के तिमाही नतीजों को लेकर भी बाजार में खास दिलचस्पी रही, क्योंकि यह बड़े कॉरपोरेट अर्निंग्स सीजन की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।

वैश्विक बाजारों से भी नहीं मिला मजबूत सहारा

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। जापान के Nikkei, दक्षिण कोरिया के Kospi और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखा गया। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में कमजोरी रही थी।

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने भी वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऊंची बॉन्ड यील्ड अक्सर इक्विटी बाजारों के लिए चुनौती पैदा करती है, क्योंकि निवेशकों के बीच सुरक्षित और ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है।

आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर?

अब बाजार की दिशा तय करने में RBI की मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों का रुख और सितंबर तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे अहम रहेंगे।

निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह समझना होगी कि मौजूदा गिरावट केवल मुनाफावसूली है या बाजार में व्यापक रूप से जोखिम से बचने का रुख बन रहा है। आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत और कंपनियों के नतीजे इसकी दिशा स्पष्ट कर सकते हैं।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर घरेलू मौद्रिक नीति, महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों का संयुक्त असर दिखाई दिया। दोपहर में सेंसेक्स करीब 668 अंक और निफ्टी करीब 246 अंक नीचे था, जबकि बाद में बाजार की गिरावट और गहरी हुई। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर अब आने वाले आर्थिक और कॉरपोरेट संकेतों पर रहेगी।

वित्तीय अस्वीकरण: यह सामग्री केवल समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसे शेयर खरीदने या बेचने की निवेश सलाह न माना जाए।