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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : वाम मोर्चा और आईएसएफ के बीच सीट बंटवारे पर नहीं बन पा रही सहमति


पश्चिम बंगाल में इस वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले वाम मोर्चा और अखिल भारतीय सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन सकी है। मंगलवार देर शाम तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और आईएसएफ के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो पाया।
बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा में आईएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी, वाम मोर्चा के राज्य अध्यक्ष बिमान बोस तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्य सचिव मोहम्मद सलीम के अलावा कुछ अन्य नेता भी उपस्थित थे। उन्ही में से एक ने बुधवार को बताया कि सीटों की संख्या को लेकर मतभेद बना हुआ है। अखिल भारतीय सेक्युलर फ्रंट ने 45 सीटों की मांग की है, जबकि वाम मोर्चा उसे 30 सीटों तक सीमित रखने के पक्ष में है।
बैठक के बाद नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि इस विषय पर बुधवार को फिर से चर्चा होगी और उन्हें उम्मीद है कि अंततः सौहार्दपूर्ण समझौता हो जाएगा।
इस बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने बताया कि वाम मोर्चा के भीतर भी सहमति बनना आसान नहीं है। अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक भी अधिक सीटों की मांग कर रहा है, खासकर तब जब कांग्रेस ने पहले ही वाम मोर्चा के साथ किसी भी सीट बंटवारे से अलग होने का निर्णय ले लिया है।
सूत्रों का कहना है कि यदि अखिल भारतीय सेक्युलर फ्रंट और फॉरवर्ड ब्लॉक दोनों की मांगें मान ली जाती हैं, तो मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को अपने हिस्से की सीटों में कटौती करनी पड़ेगी। साथ ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी जैसे अन्य सहयोगी दलों की मांगों को भी ध्यान में रखना होगा।
दूसरी ओर, अखिल भारतीय सेक्युलर फ्रंट का तर्क है कि जब कांग्रेस इस बार सीट बंटवारे में शामिल नहीं है, तो वाम मोर्चा के लिए कम से कम 40 सीटें देना कठिन नहीं होना चाहिए।