खान दु्र्घटनाओं में मृत मजदूरों को भी मिले शहीद का दर्जा - राजाराम
कथारा: खान दुर्घटनाओं में लगातार मौतें हो रही है, बॉर्डर की रक्षा में मरने वाले सैनिकों को शहीद का दर्जा मिलता है। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में युद्ध की तरह विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले मजदूरों की मौत पर उन्हें भी शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। कारखानों और खदानों में लगातार दुर्घटनायें हो रही है लेकिन दुर्घनाओं में मज़दूरों के मरने की खबरें प्रमुख मीडिया की खबरें नहीं बन पाती है। सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन हो रहा है। मुनाफा कमाने की नीति ही दुर्घटनाओं को जन्म दे रही है। मजदूरों के जान की कीमत पर उत्पादन का प्रतिरोध करना चाहिए। उपरोक्त बाते *काराकाट के भाकपा माले सांसद राजाराम सिंह* ने आज कथारा के ऑफिसर्स क्लब में कोल माइंस वर्कर्स यूनियन का केंद्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा कि पूंजीवाद साम्राज्यवाद का रूप ले रहा है ।एक ओर जहाँ प्राइवेट कंपनियाँ खुले रूप से ऐलान कर रही हैं कि अब दिन में 8 घंटे नहीं साप्ताहिक 90 घंटे काम करना चाहिए तो क्या काम के कानून रहते हुए इसके खिलाफ बयान देने वाले निजी कंपनियों पर केंद्र सरकार कार्रवाई करेगी! इस पर केंद्र की सत्ता मौन है।।
हम मजदूरों के पक्ष में खड़े हैं और सदन में मजदूर व किसानों के पक्ष में आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि नक्सल वामपंथ की आलोचना करते हुए हमारे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी अब भगत सिंह और आंबेडकर की भी आलोचना शुरू कर दिए है।पर्यावरण सिर्फ किताबों का विषय नहीं है। यह सांस लेना और जीना दोनों दूभर कर सकता है। इसीलिए बड़कागांव के किसान अड़े हुए हैं।
साथियों के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने आगे कहा कि पुराने लोगों की अधिक संख्या का मतलब यूनियन की उम्र बढ रही है ऐसे में यह तय करना लाजमी है कि नए सदस्यों को जोड़ना जरूरी है। भाकपा माले के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि आज के ही दिन नक्सलबाड़ी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। नक्सलबाड़ी के शहीदों को सलाम पेश करते हुए उन्होंने कहा कि *खेतों सड़को और खदानों में लड़ने वाले लोग केंद्र सरकार को हमेशा नक्सली ही दिखाई पड़ेगें।संविधान प्रदत्त लोक कल्याण के कानून को खत्म कर दिया जा रहा है। *मनरेगा* को खत्म कर *जी राम जी* योजना की शुरुआत इसी की कड़ी है। एक देश एक कानून की बात करने वाली सरकार पूरे देश में एक न्यूनतम मजदूरी की बात नहीं करती है। उल्टे ग्रामीण मजदूरों के रोजगार को खत्म कर दिया गया है। नए दौर में ट्रेड यूनियनों और मजदूरों को नई चुनौतियों के खिलाफ लड़ना होगा। सम्मेलन की शुरुआत के पूर्व कथारा जी एम ऑफिस स्थित शहीद बिरसा मुंडा और भीम राव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। सभागार के मैदान में मजदूर आंदोलन के शहीदों की याद में बनी शहीद वेदी पर यूनियन का झंडोत्तोलन वरिष्ठ मजदूर नेता उपेंद्र सिंह ने किया तत्पश्चात वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित कर एक मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। सम्मेलन में आदिवासी संस्कृति मंच के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया गया। कोल माइंस वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सम्मेलन के खुले सत्र को भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद, किसान महासभा के नेता सह पूर्व विधायक राजकुमार यादव, महेश सांवरिया, गोपाल शरण, शोभा देवी,पत्रकार हरेंद्र मिश्रा आदि नेताओं ने संबोधित किया सभी अतिथियों को मोमेंटो और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। केंद्रीय सम्मेलन में सीसीएल, ईसीएल, बीसीसीएल के कोयला क्षेत्र से जुड़े 200 प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन के मुख्य प्रयवेक्षक देवदीप सिंह दिवाकर थे तथा कार्यक्रम का संचालन विकास कुमार सिंह ने किया। सम्मेलन को सफलतापूर्वक आयोजित करनेवालों में बालेश्वर गोप, भुवनेश्वर केवट, बालेश्वर यादव, अजय रविदास, बालगोविंद मंडल, नारायण केवट,हरि शंकर आदि की भागीदारी रही।




