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देवघर में दिनदहाड़े HDFC बैंक में डकैती, हथियारों के बल पर कर्मचारियों और ग्राहकों को बनाया बंधक


  देवघर, झारखंड: झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर में एक निजी बैंक की शाखा में दिनदहाड़े हुई डकैती ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। घटना शहर के व्यस्त राजबाड़ी रोड स्थित HDFC बैंक शाखा में हुई, जहां हथियारों से लैस अपराधियों के एक समूह ने बैंक में घुसकर कर्मचारियों और ग्राहकों को धमकाया और कैश तथा सोने के आभूषण लेकर फरार हो गए। पुलिस के अनुसार, वारदात के दौरान कम से कम एक बैंक कर्मचारी के साथ मारपीट भी की गई।

दोपहर के समय बैंक में घुसे अपराधी

पुलिस के मुताबिक, वारदात करीब दोपहर 12:45 बजे हुई। छह हथियारबंद अपराधी तीन मोटरसाइकिलों से बैंक के आसपास पहुंचे और इसके बाद शाखा के अंदर दाखिल हुए।

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हेलमेट और चेहरे को ढकने वाले कपड़ों का इस्तेमाल किया था, जबकि अन्य के चेहरे कथित तौर पर दिखाई दे रहे थे। कम से कम तीन अपराधियों के पास पिस्तौल होने की बात पुलिस ने बताई।

कर्मचारियों और ग्राहकों को हथियारों से धमकाया

बैंक के अंदर पहुंचने के बाद बदमाशों ने हथियारों के बल पर कर्मचारियों और ग्राहकों को नियंत्रित कर लिया। रिपोर्टों के अनुसार, अपराधियों ने लोगों को धमकाया और बैंक कर्मचारी के साथ मारपीट की।

हालांकि पुलिस के अनुसार, अपराधियों ने इस दौरान गोली नहीं चलाई। घायल बैंक कर्मचारी को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई थी।

कैश और सोने के आभूषण लेकर फरार

डकैतों ने बैंक से नकदी के साथ सोने के आभूषण और सोने के सिक्के भी लूटे। शुरुआती रिपोर्टों में लूट की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए।

पुलिस ने शुरुआती दौर में कहा था कि बैंक अधिकारी लूटी गई नकदी और अन्य सामान की गिनती कर रहे हैं। बाद की रिपोर्टों में लूटे गए कैश और कीमती सामान की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान सामने आया, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा करीब दो करोड़ रुपये तक बताया गया। इसलिए अंतिम रकम बैंक की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर मानी गई।

CCTV का DVR भी साथ ले गए

इस वारदात में अपराधियों ने सिर्फ पैसे और सोने के सामान को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि बैंक के CCTV सिस्टम से जुड़ा DVR भी अपने साथ ले जाने की बात सामने आई।

ऐसा किए जाने से पुलिस के सामने अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों की सीधी तस्वीर हासिल करने की चुनौती बढ़ गई। हालांकि जांचकर्ताओं ने बैंक के अलावा आसपास की सड़कों और दूसरे स्थानों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी थी।

बैंक का शटर बाहर से बंद कर भागे

रिपोर्टों के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधियों ने बैंक का शटर गिरा दिया और उसे बाहर से लॉक कर दिया। इसके बाद वे मोटरसाइकिलों से मौके से फरार हो गए।

जब बैंक के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी तो पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों को बैंक में प्रवेश करने के लिए शटर का ताला तोड़ना पड़ा।

पुलिस ने बनाई SIT

घटना की गंभीरता को देखते हुए देवघर पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया। देवघर के तत्कालीन एसपी सौरभ कुमार ने बताया था कि पुलिस की टीमें अपराधियों की तलाश में लगाई गई हैं।

जांचकर्ताओं ने बैंक के आसपास और अपराधियों के संभावित भागने वाले रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी थी कि तीनों मोटरसाइकिलें कहां से आईं और वारदात के बाद अपराधी किस रास्ते से निकले।

दूसरे जिलों के अपराधी गिरोहों से भी लिंक की जांच

जांच के दौरान पुलिस ने देवघर के अलावा गिरिडीह और जामताड़ा में सक्रिय आपराधिक गिरोहों से संभावित संबंधों की भी पड़ताल की। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि क्या इस वारदात के पीछे पहले से सक्रिय किसी गिरोह का हाथ है या अपराधियों ने किसी स्थानीय व्यक्ति की मदद से बैंक की रेकी की थी।

बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

दिनदहाड़े और शहर के व्यस्त इलाके में हुई इस वारदात ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। अपराधियों को यह जानकारी कैसे मिली कि बैंक में उस समय पर्याप्त नकदी और कीमती सामान मौजूद था, क्या पहले से रेकी की गई थी और क्या बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमजोरी थी—जांच में इन पहलुओं को भी देखा जाना महत्वपूर्ण था।

पुलिस की प्राथमिकता अपराधियों की पहचान, उनके भागने के रास्ते का पता लगाने और लूटे गए सामान की बरामदगी थी।

जांच में किन बिंदुओं पर फोकस?

पुलिस की जांच में मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे थे—

  • अपराधी बैंक तक किस रास्ते से पहुंचे?

  • तीनों मोटरसाइकिलों की पहचान और उनके मालिक कौन हैं?

  • बैंक की रेकी पहले से की गई थी या नहीं?

  • अपराधियों को बैंक में मौजूद कैश और सोने के सामान की जानकारी कैसे मिली?

  • CCTV DVR को ले जाने के पीछे क्या उद्देश्य था?

  • आसपास के CCTV कैमरों में अपराधियों और उनकी बाइक की कोई तस्वीर मिली या नहीं?

  • वारदात के बाद अपराधी किस दिशा में भागे?

  • क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने अपराधियों को जानकारी या लॉजिस्टिक मदद दी?

  • लूटे गए कैश और सोने के सामान का वास्तविक मूल्य कितना था?

आगे की कार्रवाई

पुलिस ने अपराधियों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया था। जांच में CCTV फुटेज, बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों के बयान तथा अन्य उपलब्ध सुरागों को मिलाकर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

इस मामले में शुरुआती रिपोर्टों में लूट की रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इसलिए अंतिम राशि और बरामदगी से जुड़ी जानकारी पुलिस या बैंक की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही निश्चित मानी जानी चाहिए।

कुल मिलाकर, मधुपुर के व्यस्त राजबाड़ी रोड पर दिनदहाड़े हुई यह बैंक डकैती सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी। हथियारबंद अपराधियों ने कुछ ही मिनटों में बैंक के भीतर मौजूद लोगों को नियंत्रित किया और नकदी तथा सोने के सामान लेकर फरार हो गए। अब जांच का मुख्य फोकस अपराधियों की पहचान, उनके नेटवर्क और लूटे गए सामान की बरामदगी पर है।