हाईकोर्ट के आदेश के 12 हफ्ते बाद भी नहीं मिला ग्रेड-I का लाभ, विभाग पर लटकी अवमानना की तलवार.
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
अमित कुमार
देवघर : झारखंड हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद देवघर के शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से ग्रेड-I वेतन का लाभ नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने 12 हफ्ते में भुगतान का निर्देश दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी शिक्षा विभाग ने आदेश पर अमल नहीं किया। इससे नाराज शिक्षकों ने इसे न्यायालय की 'अवमानना' करार दिया है।
*क्या है मामला*
हाईकोर्ट रांची में W.P.(S) No.3157 of 2025 के तहत अनिल नाथ मिश्रा, राकेश चंद्रा बिहारी लाल झा, ज्ञानेश्वर पंडित और रेणु देवी ने याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नियुक्ति तिथि से ग्रेड-I वेतन का लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने 07 अगस्त 2025 को सुनवाई के बाद अहम आदेश दिया।
*कोर्ट ने क्या कहा था*
न्यायमूर्ति 'आनंदा सेन' की पीठ ने आदेश में कहा कि इस मुद्दे पर हाईकोर्ट पहले ही कई फैसले दे चुका है। रिटायर या मृत कर्मियों को लाभ देने से रोकने वाले प्रावधान को खारिज किया जा चुका है। इसका मतलब है कि सभी कर्मी, चाहे रिटायर हों या दिवंगत, नियुक्ति तिथि से ग्रेड-I वेतन के नॉशनल लाभ के हकदार हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 04 हफ़्ते में देवघर के जिला शिक्षा अधीक्षक के समक्ष विस्तृत आवेदन देने को कहा था। विभाग को आवेदन मिलने के 06 हफ्ते में फैसला करना था। पूरी प्रक्रिया 12 हफ्ते में पूरी करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई प्रतिकूल आदेश पास होता है तो उसका कारण याचिकाकर्ताओं को बताना होगा।
*विभाग पर लापरवाही का आरोप*
शिक्षकों का कहना है कि कोर्ट का आदेश मिलने और आवेदन देने के बावजूद शिक्षा विभाग, देवघर डीएसई और अन्य संबंधित अधिकारियों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है। केवल कोर्ट आने वाले लोगों को लाभ दिया जा रहा है, जबकि कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि सभी समान परिस्थिति वाले कर्मियों को कोर्ट का दरवाजा खटखटाए बिना ही लाभ मिले।
पीड़ित शिक्षकों ने कहा कि कोर्ट के आदेश की अनदेखी सीधे-सीधे अवमानना है। अब वे अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
*डीएसई ने कहा*
इस बारे में देवघर के जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने 'रांची एक्सप्रेस' को बताया कि इस संबंध में वित्त विभाग को पत्र भेजा गया है। जल्द ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर शिक्षकों ने मांग की है कि 'हाईकोर्ट के आदेश का तुरंत अनुपालन' कर बकाया राशि का भुगतान किया जाए, वर्ना शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर 'अवमानना' की कार्रवाई तय है।





