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धनबाद में साइबर अपराध पर पुलिस की सख्ती, हर इंस्पेक्टर को तीन मामलों के निष्पादन का लक्ष्य


धनबाद। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों और लंबित जांच को लेकर धनबाद पुलिस ने अनुसंधान की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी की है। एसएसपी प्रभात कुमार ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हर इंस्पेक्टर को कम से कम तीन साइबर मामलों के निष्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

150 लंबित साइबर मामलों की समीक्षा

पुलिस सभागार में हुई समीक्षा बैठक में साइबर थाना में लंबित मामलों की स्थिति, अब तक की जांच और मामलों के निष्पादन की प्रगति की जानकारी ली गई। रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर थाना में करीब 150 मामले लंबित हैं।

एसएसपी ने इन मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि जांच में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। पुलिस को अगले दो महीनों के भीतर लंबित साइबर मामलों की संख्या 50 से कम करने का लक्ष्य दिया गया है।

हर इंस्पेक्टर को तीन मामलों का लक्ष्य

समीक्षा के दौरान पुलिस निरीक्षकों को प्रत्येक महीने कम से कम तीन साइबर मामलों के निष्पादन का लक्ष्य दिया गया। इसका उद्देश्य केवल लंबित केस कम करना नहीं, बल्कि जांच की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना भी है।

अधिकारियों को मामलों की प्रकृति के अनुसार उपलब्ध तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हुए जांच आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

डिजिटल सबूतों पर विशेष जोर

साइबर अपराध की जांच में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सोशल मीडिया, इंटरनेट गतिविधियों और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे साक्ष्यों को सही तरीके से पहचानना, सुरक्षित रखना और उनका विश्लेषण करना जांच की गुणवत्ता के लिए जरूरी है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए धनबाद पुलिस अधिकारियों के लिए तकनीकी और फोरेंसिक जांच से जुड़ा प्रशिक्षण भी आयोजित कर रही है।

चार दिवसीय प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

सितंबर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों को डिजिटल फॉरेंसिक, डिजिटल एविडेंस और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की पहचान, उनके संरक्षण और संग्रह के साथ-साथ विश्लेषण तथा न्यायिक प्रक्रिया में उनके इस्तेमाल से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने अधिकारियों को यह समझाने पर जोर दिया कि डिजिटल साक्ष्य के साथ सही प्रक्रिया अपनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि जांच के दौरान प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने के लिए उसकी विश्वसनीयता और संरक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

डिजिटल फुटप्रिंट की पहचान पर भी फोकस

एक अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम में डिजिटल फुटप्रिंट की पहचान और सुरक्षित तरीके से उसके संग्रह को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया। इसमें जिले के थाना स्तर के इंस्पेक्टर, साइबर थाना के अधिकारी और तकनीकी जांच से जुड़े पुलिसकर्मी शामिल रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षण का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को IT और साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच में अधिक दक्ष बनाना है, ताकि पारंपरिक पुलिसिंग के साथ आधुनिक तकनीकी जांच को भी प्रभावी तरीके से जोड़ा जा सके।

अपराध के बदलते तरीके बनी चुनौती

पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण के दौरान यह बात सामने रखी गई कि अपराधी अब मोबाइल, सोशल मीडिया, इंटरनेट और दूसरी डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल पारंपरिक जांच पद्धतियां पर्याप्त नहीं हो सकतीं।

इसी कारण पुलिस जांचकर्ताओं को तकनीकी साक्ष्यों की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से उनके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।

जांच की गुणवत्ता पर भी नजर

लंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लक्ष्य के साथ-साथ पुलिस के सामने जांच की गुणवत्ता बनाए रखने की चुनौती भी है। किसी साइबर मामले में जल्द निष्पादन के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि डिजिटल साक्ष्य सही तरीके से सुरक्षित किए जाएं और जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़े।

इस दिशा में प्रशिक्षण को पुलिस की जांच क्षमता मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी

साइबर थाना के लंबित मामलों की समीक्षा और इंस्पेक्टरों के लिए निर्धारित लक्ष्य के बाद अब संबंधित अधिकारियों पर मामलों को समय पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। पुलिस की योजना लंबित मामलों की संख्या घटाने के साथ-साथ साइबर अपराध की जांच में तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की है।

निष्कर्ष

धनबाद पुलिस ने साइबर अपराध के लंबित मामलों को लेकर जांच तेज करने का फैसला किया है। हर इंस्पेक्टर को कम से कम तीन साइबर मामलों के निष्पादन का लक्ष्य दिया गया है और अगले दो महीनों में लंबित मामलों की संख्या 50 से कम करने का निर्देश है। साथ ही डिजिटल फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच के प्रशिक्षण के जरिए पुलिस अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

कॉपीराइट नोट: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों में दिए गए तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों और नए वाक्य-विन्यास में तैयार की गई है। इसे किसी प्रकाशित समाचार की लाइन-दर-लाइन कॉपी नहीं किया गया है। तस्वीर, वीडियो और ग्राफिक्स के अधिकार अलग से जांचे जाने चाहिए।