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गिरिडीह में कंपनी सुपरवाइजर के अपहरण और हत्या का खुलासा, चार गिरफ्तार


गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिले में कंपनी के एक सुपरवाइजर के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मंजेश कुमार 6 सितंबर को लापता हुए थे। जांच के दौरान पुलिस ने उनकी तलाश तेज की और आखिरकार बिहार के चिहरा थाना क्षेत्र के पिपरतरी जंगल से उनका शव बरामद किया गया।

6 सितंबर को लापता हुए थे मंजेश कुमार

पुलिस के अनुसार, मंजेश कुमार को 6 सितंबर को गिरिडीह के तिसरी थाना क्षेत्र में बाघमारी मोड़ के पास खटपोंख इलाके से कथित तौर पर अगवा किया गया था।

मंजेश के लापता होने के बाद परिवार की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। उनके भाई गौतम कुमार की शिकायत के आधार पर तिसरी थाने में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया।

जांच के लिए SIT का गठन

मामले की जांच के लिए खोरी महुआ एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच टीम यानी SIT बनाई गई। टीम ने मंजेश के मोबाइल फोन, संपर्क में रहे लोगों और उनके काम से जुड़े विवादों की जानकारी जुटानी शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनके आधार पर संदिग्धों से पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया।

चार लोगों की गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवघर के खिजुरिया निवासी इम्तियाज अंसारी, तिसरी के पिंटू कुमार यादव, गिरिडीह के नावाडीह चट्टी निवासी राजेश कुमार सिंह और बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी शिव कुमार के रूप में हुई है।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर मंजेश के शव तक पहुंचने में मदद मिली। इसके बाद बिहार के पिपरतरी जंगल से शव बरामद किया गया।

काम से जुड़े विवाद का एंगल

पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे काम और खर्च को लेकर विवाद का एंगल सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट मैनेजर उपेंद्र चौधरी और मंजेश कुमार के बीच काम में कथित हस्तक्षेप और खर्च को लेकर विवाद था। इसमें डीजल के खर्च का मुद्दा भी शामिल बताया गया है।

पुलिस ने उपेंद्र चौधरी को भी मामले में आरोपी बनाया है और उसकी तलाश जारी होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, हत्या में उनकी कथित भूमिका को अदालत में साबित किया जाना अभी बाकी है।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एक मोटरसाइकिल, खून से सना पत्थर, एक डंडा और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

इन सामानों को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस इनकी फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है।

हत्या की वजह की जांच जारी

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मंजेश कुमार का अपहरण क्यों किया गया और उनकी हत्या की पूरी योजना कैसे बनाई गई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में गिरफ्तार चार लोगों की क्या-क्या भूमिका थी और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।

जांच टीम अपहरण से लेकर शव को बिहार के जंगल में ठिकाने लगाने तक की पूरी कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी

इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच को अहम सफलता मिली है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। फरार बताए जा रहे आरोपियों की तलाश के साथ-साथ बरामद सामान और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

मामले में गिरफ्तार लोगों पर लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपियों को कानूनी रूप से निर्दोष माना जाता है।

गिरिडीह के इस मामले में पुलिस अब हत्या के पीछे की पूरी वजह, कथित साजिश और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है।