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हजारीबाग में वन भूमि फर्जीवाड़े पर ACB का शिकंजा, जमीन विक्रेता गिरफ्तार


हजारीबाग। जिले में वन और सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB ने एक और कार्रवाई की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सदर अंचल के मुकुंदगंज क्षेत्र से 58 वर्षीय जमीन विक्रेता कुलेश्वर प्रजापति को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

वन और सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का आरोप

यह कार्रवाई ACB थाना कांड संख्या 11/25 से जुड़ी बताई जा रही है। इस मामले की जांच कथित तौर पर वन भूमि, सरकारी जमीन और गैरमजरूआ खास सहित अन्य सरकारी श्रेणी की जमीनों की अनियमित खरीद-बिक्री और बाद में उनके रिकॉर्ड में बदलाव से संबंधित है। ACB ने सितंबर 2025 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि कुछ जमीनों को निजी लेन-देन के जरिए आगे बढ़ाया गया और उसके बाद राजस्व रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज या म्यूटेशन कराने की प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं। मामले में फर्जी अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

पहले भी कई लोगों पर हो चुकी है कार्रवाई

हजारीबाग के इस भूमि प्रकरण में ACB की कार्रवाई नई नहीं है। इससे पहले तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार समेत कई सरकारी कर्मचारियों, जमीन कारोबारियों और अन्य आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। दिसंबर 2025 में ACB ने इसी मामले से जुड़े आठ लोगों की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई थी।

जांच का दायरा केवल जमीन बेचने या खरीदने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। एजेंसी यह भी देख रही है कि सरकारी रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही।

फर्जी दस्तावेज और म्यूटेशन प्रक्रिया जांच के केंद्र में

मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी राजस्व रिकॉर्ड और जमीन के दस्तावेज बताए जा रहे हैं। ACB कथित तौर पर यह जांच कर रही है कि जमीन के वास्तविक स्वरूप और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति के बीच कोई अंतर पैदा किया गया था या नहीं।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि यदि वन या सरकारी श्रेणी की जमीन का निजी व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरण या म्यूटेशन कराया गया, तो उसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज इस्तेमाल हुए और संबंधित प्रक्रिया को किस स्तर पर मंजूरी मिली।

बड़े भूमि नेटवर्क की भी हो रही पड़ताल

ACB की ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले की जांच के और विस्तृत होने की संभावना है। अधिकारियों द्वारा जमीन से जुड़े दस्तावेजों, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और लेन-देन की प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य कथित अवैध लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों और संभावित लाभार्थियों की पहचान करना भी बताया गया है।

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने भी हजारीबाग भूमि मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और सरकारी प्रक्रियाओं के दुरुपयोग से हासिल करने के आरोपों को गंभीरता से देखा था। हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ आरोप या जांच अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है; अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।

अब आगे क्या होगा?

कुलेश्वर प्रजापति को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद ACB जांच में उनके कथित लेन-देन, जमीन के दस्तावेज और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती है। साथ ही एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित जमीन फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।

जांच आगे बढ़ने के साथ दस्तावेजों की सत्यता, म्यूटेशन प्रक्रिया और सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल इस मामले में ACB की जांच जारी है।

खबर का सार

हजारीबाग के मुकुंदगंज क्षेत्र में वन और सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीद-बिक्री मामले में ACB ने 58 वर्षीय जमीन विक्रेता कुलेश्वर प्रजापति को गिरफ्तार किया है। मामला फर्जी दस्तावेज, कथित अवैध म्यूटेशन और सरकारी भूमि के लेन-देन से जुड़ा है। जांच एजेंसी पहले भी इस केस में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।