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जमशेदपुर में जमीन कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड में बड़ा खुलासा, कोलकाता पुलिसकर्मी और महिला स्वयंसेवक गिरफ्तार


जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर में कारोबारी और जमीन से जुड़े कारोबार से जुड़े निखार सबलोक की हत्या की जांच में बड़ा नया मोड़ सामने आया है। हत्या की जांच अब झारखंड से निकलकर पश्चिम बंगाल के कोलकाता तक पहुंच गई है। सरायकेला-खरसावां और जमशेदपुर पुलिस की संयुक्त जांच टीम ने कोलकाता में कार्रवाई करते हुए कोलकाता पुलिस के ट्रैफिक सार्जेंट अयान गुप्ता और सिविक वॉलंटियर ट्विंकल दास उर्फ मीमी दास को गिरफ्तार किया है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, दोनों पर आरोप है कि उन्होंने निखार सबलोक और कुछ अन्य लोगों की मोबाइल लोकेशन हासिल कर उसे हत्याकांड से जुड़े लोगों तक पहुंचाने में मदद की। जांच में कथित तौर पर इसके बदले पैसे के लेन-देन के संकेत भी मिले हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच के बाद ही होगी।

24 अगस्त को हुई थी निखार सबलोक की हत्या

पुलिस के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को निखार सबलोक की चांडिल थाना क्षेत्र में एनएच-33 स्थित टेंथ माइल स्टोन होटल के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों की जांच शुरू की।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल संचार से जुड़े साक्ष्यों को खंगाला। इसी प्रक्रिया में कथित तौर पर कोलकाता कनेक्शन सामने आया।

मोबाइल लोकेशन बनी जांच की अहम कड़ी

जांच में सामने आए पुलिस सूत्रों के अनुसार, निखार सबलोक की गतिविधियों पर हत्या से पहले भी नजर रखी जा रही थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 24 जुलाई से 23 अगस्त के बीच कई बार उनकी मोबाइल लोकेशन ट्रेस की गई।

पुलिस के अनुसार, हत्या वाले दिन यानी 24 अगस्त को भी दोपहर में निखार की लोकेशन कई बार हासिल की गई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उस दिन करीब 2:06 बजे, 2:32 बजे, 2:42 बजे और 2:58 बजे लोकेशन हासिल की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोकेशन का इस्तेमाल किस तरह और किसके निर्देश पर किया गया।

लोकेशन के बदले पैसे देने का आरोप

जांच से जुड़े प्रकाशित विवरणों के मुताबिक, अयान गुप्ता और ट्विंकल दास पर आरोप है कि वे मोबाइल लोकेशन उपलब्ध कराने के बदले पैसे लेते थे। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रति लोकेशन करीब 5 हजार से 7 हजार रुपये तक भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस अब कथित आर्थिक लेन-देन की कड़ियों की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लोकेशन की मांग कौन करता था, जानकारी किस माध्यम से भेजी जाती थी और इसके बाद वह सूचना किन लोगों तक पहुंचती थी।

पुलिस ने तीन मोबाइल फोन जब्त किए

कोलकाता में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से तीन स्मार्टफोन जब्त किए हैं। इनमें दो वीवो और एक ओप्पो कंपनी का फोन बताया गया है। पुलिस इन उपकरणों से कॉल डिटेल, मैसेज, चैट और अन्य डिजिटल डेटा की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियों के लिए मोबाइल डेटा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि आरोपियों के बीच कब और किससे संपर्क हुआ था तथा निखार की लोकेशन से संबंधित कोई सूचना किसे भेजी गई थी।

हत्या की साजिश में पहले ही कई गिरफ्तारियां

निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस इससे पहले भी कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अशोक सिंह राघव, सुनील रजक, रितेश सिंह, राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस, अंकित सिंह और अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह समेत कई आरोपी पहले ही पुलिस की गिरफ्त में हैं।

पुलिस अब यह जांच रही है कि कोलकाता से गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की इन लोगों के साथ क्या भूमिका और संपर्क था। साथ ही कथित तौर पर फरार बताए जा रहे शूटर सागर सिंह की तलाश भी जारी है।

जमीन और कारोबारी विवाद का एंगल भी जांच में

हत्याकांड की शुरुआती जांच को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में जमीन विवाद, कारोबारी रंजिश और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े एंगल सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में पुलिस जांच के हवाले से हत्या के लिए करीब 15 लाख रुपये की कथित सुपारी दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये जांच के दौरान सामने आए आरोप और पुलिस के प्रारंभिक निष्कर्ष हैं; इनकी अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है।

अब पुलिस के सामने कई अहम सवाल

कोलकाता कनेक्शन सामने आने के बाद जांच का फोकस कुछ महत्वपूर्ण सवालों पर है—

  • निखार की मोबाइल लोकेशन किसके निर्देश पर हासिल की जाती थी?

  • लोकेशन किन लोगों को भेजी जाती थी?

  • कथित पैसों का लेन-देन किस माध्यम से हुआ?

  • कोलकाता में गिरफ्तार दोनों आरोपियों का हत्याकांड के मुख्य आरोपियों से संपर्क कब और कैसे हुआ?

  • हत्या से पहले निखार की गतिविधियों पर कितने समय से नजर रखी जा रही थी?

  • क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे?

पुलिस जब्त मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के जरिए इन सवालों के जवाब तलाश रही है।

आगे और गिरफ्तारियां संभव

जांच टीम का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हत्याकांड से जुड़ी अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि निखार की हत्या की योजना बनाने, उनकी गतिविधियों पर नजर रखने और कथित तौर पर शूटरों तक जानकारी पहुंचाने में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी।

फिलहाल कोलकाता से गिरफ्तार दोनों आरोपियों को झारखंड लाकर अदालत में पेश किया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस आगे पूछताछ के लिए रिमांड लेने की प्रक्रिया भी कर रही है।

निष्कर्ष

निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में अब मोबाइल लोकेशन और डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल हो गए हैं। कोलकाता पुलिस के एक ट्रैफिक सार्जेंट और महिला सिविक वॉलंटियर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित लोकेशन नेटवर्क कितना बड़ा था और इसका हत्या की साजिश से वास्तविक संबंध क्या था।

ध्यान रहे कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक किसी भी आरोपी को कानूनन दोषी नहीं माना जाता।