पर्स गुम होने के गम में दो दिन खाना नही खाया टेम्पू ड्राइवर संजय मल्लिक, जय हो टीम ने पेश की ईमानदारी की मिशाल
दो दिन पूर्व संजय मल्लिक नाम पैसेंजर टेम्पू ड्राइवर अपना फण्ड जमा करने के लिए तिनका तिनका जोड़कर पाँच हजार पाँच सौ रुपये जमा किया था। इस बीच उसकी माँ बीमार थी उन्हें 10 जून को डिस्चार्ज करा कर लाया। उसके बाद एम जी एम से भाड़ा लेकर पी एम मॉल गया। लौटने के क्रम अपने घर की बात सोचते सोचते बिस्टुपुर गलत टर्न लिया और 500 रुपया से फाइन जमा करना पड़ा। बाकी पैसा उसके पर्स में था। रात में टेम्पू खड़ा करने वाले क्षेत्र में उसका पर्स गिर गया। सुबह पूर्व सैनिक सुशील कुमार सिंह पर्स गिरने के पास ही अपना स्कूटी खड़ा किये। मगर पर्स पर ध्यान नही गया। उसके तुरन्त बाद पूर्व थल सैनिक रजत डे आये और पर्स सुशील सिंह के पास जमा करा दिए। पर्स में हजारों रुपया देखकर चिंता हुई कि इस ब्यक्ति के पास कैसे पहुँचा जाए। इसलिये पर्स का फोटो खींचकर फेसबुक पर डाला गया ताकि पर्स मालिक तक खबर पहुँचाया जाए। और सही पहचान बताने वाले को पर्स में रखे सारे डॉक्यूमेंट सुपुर्द किया जाए। कल रात तक हजारों लोगों ने पोस्ट देखा मगर कुछ पता नही चला। आज सुबह 5.45 बजे जब जय हो टीम ने डॉक्यूमेंट के आधार पर सर्च जारी किया तो पास खड़े संजय मल्लिक ने पर्स खोने की बात और पहचान बताई। पर्स देखकर खुशी का ठिकाना नही था। उनका कहना था कि सारा पैसा ले लीजिए और पर्स दे दीजिए।मगर जय हो टीम में फौजियों के साथ साथ शहर के जिम्मेदार लोग जुड़े हैं। जो नित्य अपने दैनिक जीवन की कमाई से समाज की सेवा जरूरतमंदों का सहयोग करते रहते हैं। दो दिन से खोया पर्स मिलने की उम्मीद नही थी। दिन भर संजय झाड़ी में घूम घूम कर पर्स खोज रहा था कि सायद कोई ब्यक्ति पैसा निकाल कर पर्स झाड़ी में फेंक दिया हो। मगर आज सैनिकों के द्वारा पर्स पाकर पूरी टीम को बधाई दिया एवं भविष्य सहयोग के लिए अपना नम्बर साझा किया। इस पूरे प्रकरण में समाज सेवी पूर्व सैनिक सुशील कुमार सिंह मुख्य भूमिका निभाते हुवे अपने टीम के साथ नेक कार्य करने का नमूना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रजत डे प्रदीप मिश्रा जय प्रकाश पाठक नानू भाई बानरा जी ने सहयोगी की भूमिका अदा की।
दूसरी घटना आज ही घटी जब महेश जोशी उर्फ नानू का मोबाइल डिमना चौक पर गिर गया था जिसको आवाज लगाकर एक दुसरे टेम्पू ड्राइवर और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी के सहयोग से बरामद हुआ।
इसलिए कहते हैं कि कर भल्ला तो हो भल्ला।
किसी का खोया सामान रख लेने से अच्छा है कि प्रयास करके उस ब्यक्ति तक पहुँचा दिया जाए। इससे समाज बदलेगा। और परम् सुख की प्राप्ति होगी।





