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12 दिनों से अस्पताल में पड़ा था अज्ञात शव, संजय अग्रवाल ने निभाया इंसानियत का धर्म; अब तक तीन लावारिस शवों का करा चुके हैं अंतिम संस्कार


उदय किशोर सिंह

जामताड़ा। इंसान की पहचान उसके नाम और चेहरे से ही नहीं, बल्कि उसके कर्मों और संवेदनाओं से भी होती है। जब अपनों का साथ छूट जाता है और किसी मृत व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए कोई आगे नहीं आता, तब मानवता का असली धर्म निभाने वाले लोग समाज के सामने मिसाल बनते हैं। जामताड़ा चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने एक बार फिर ऐसा ही उदाहरण पेश किया है। सदर अस्पताल में पिछले 12 दिनों से पड़े एक अज्ञात शव का शनिवार को उन्होंने अपने सौजन्य से अजय नदी तट स्थित मुक्तिधाम में पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया। संजय अग्रवाल अब तक तीन लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी थी। वहीं, अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन अथवा अन्य व्यक्ति सामने नहीं आया। ऐसे में शव के अस्पताल में पड़े होने की जानकारी जामताड़ा नगर थाना प्रभारी मनोज महतो के माध्यम से संजय अग्रवाल को मिली। उन्होंने मामले को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक दायित्व से जुड़ा विषय माना। इसके बाद उन्होंने थाना प्रभारी से बातचीत कर आवश्यक सहयोग प्राप्त किया और प्रशासन के सहयोग से शव को सदर अस्पताल से अजय नदी तट स्थित मुक्तिधाम ले जाकर सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया।
पहचान भले न हो, अंतिम विदाई सम्मानजनक होनी चाहिए
संजय अग्रवाल ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान भले ही नहीं हो, लेकिन उसकी अंतिम यात्रा सम्मान के साथ पूरी होनी चाहिए। मृत्यु के बाद हर व्यक्ति सम्मानजनक विदाई का हकदार है। किसी लावारिस शव का अंतिम संस्कार करना केवल एक मृत व्यक्ति की अंतिम क्रिया संपन्न करना नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करना है।
उन्होंने कहा कि समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह जरूरत के समय इंसानियत के काम आए। यदि किसी मृत व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाती और उसके परिजनों का पता नहीं चलता, तो ऐसी परिस्थिति में उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। ऐसे कार्यों में प्रशासन के साथ समाज के लोगों को भी संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के साथ आगे आना चाहिए।
युवाओं से अपील—लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में आगे आएं
चेंबर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने आम नागरिकों और खासकर नवयुवकों से अपील की कि वे लावारिस शवों के अंतिम संस्कार जैसे मानवीय कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में सेवा, करुणा, परोपकार और मृत व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देने की परंपरा को विशेष महत्व दिया गया है। इस परंपरा को केवल शब्दों तक सीमित रखने के बजाय अपने कर्मों से आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ-साथ ऐसे मामलों में भी अपनी जिम्मेदारी समझें। किसी लावारिस व्यक्ति की अंतिम क्रिया में सहयोग करना मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। इससे समाज में संवेदनशीलता, आपसी सहयोग और सेवा भावना मजबूत होगी।
सामाजिक कार्यों में लगातार सक्रिय हैं संजय अग्रवाल
संजय अग्रवाल जामताड़ा में सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे हैं। लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की पहल उनके सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदना को दर्शाती है। अब तक तीन लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में योगदान देकर उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल जीवित लोगों की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि मृत्यु के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करना जरूरी है।
स्थानीय लोगों ने भी उनके इस कदम की सराहना की। लोगों का कहना है कि जब किसी अज्ञात व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए कोई आगे नहीं आता, तब इस तरह की पहल समाज में इंसानियत और परोपकार की भावना को मजबूत करती है। संजय अग्रवाल की यह पहल लोगों को प्रेरित करती है कि वे जाति, धर्म, पहचान और परिचय से ऊपर उठकर जरूरत के समय मानवता का साथ दें।
संदेश स्पष्ट है—नाम और पहचान भले ही पीछे छूट जाएं, लेकिन इंसान को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई मिलनी चाहिए। यही इंसानियत का धर्म और सामाजिक संवेदना की सच्ची पहचान है।