मेदिनीनगर : मेदिनीनगर नगर निगम खुद को नियमों से ऊपर मानता है। यह कहना है मत्स्यजीवी सहयोग समिति के मुकेश कुमार चौधरी का। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो मेदिनीनगर निगम के पदाधिकारी खुद को किसी से कम नहीं समझता है। किसी एक तालाब का सालाना राजस्व 55 लाख रुपये रख दिया गया है। इतनी राशि में तो झारखंड के कई जिलों का राजस्व मत्स्य विभाग सरकारी खजाने में जमा करता है। आखिर सभी नियमों को ताक पर रखकर निगम मछुवारों से तालाब छीनकर उन्हें भूखा मारने का प्रयास क्यों कर रहा है? सभी तालाबों का तत्काल टेंडर को रद्द किया जाए नहीं तो चौधरी समाज इसका पुरजोर विरोध करेगा।






