BREAKING NEWS

logo

क्या चुनाव देश की समस्याओं से बड़ा हो गया है : पूर्णिमा पांडे


पलामू : विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खाड़ी युद्ध के भारत पर असर की चेतावनी के बाद भी मोदी सरकार चुनाव में व्यस्त रही। देश इस समय गंभीर आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण पूरी दुनिया संभावित तेल संकट और सप्लाई बाधाओं को लेकर चिंतित थी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि यदि स्थिति बिगड़ी तो इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। विपक्ष नेता राहुल गांधी भी  संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस मुद्दे को उठाया कि आने वाले समय में देश को आर्थिक दबाव और ईंधन संकट का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन ऐसा लगा कि उस समय सरकार की प्राथमिकता इन संभावित संकटों की तैयारी नहीं, बल्कि चुनावी रणनीतियाँ और राजनीतिक समीकरण थे। क्योंकि बंगाल समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव जो था । लगभग 45 दिन तक पूरा राजनीतिक विमर्श चुनावों के इर्द-गिर्द घूमता रहा, जबकि दुनिया वैश्विक संकट की आशंका पर चर्चा कर रही थी। चुनाव ख़त्म होते ही देशहित याद आ रहा है । 
प्रधानमंत्री जनता से अपील कर रहे हैं 
सोना नहीं ख़रीदना है 
विदेश घुमने नहीं जाना है 
घर से काम कीजिये। पेट्रोल बचत करें। चुनाव समाप्त हो चुके हैं, तब पेट्रोल-डीजल की कीमतों, उपलब्धता और सप्लाई को लेकर आम जनता परेशान दिखाई दे रही है। कई जगहों पर लंबी लाइनें लगीं हैं, लोगों में असमंजस और चिंता बढ़ गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने शुरू हो गये । सवाल यह है कि यदि दुनिया पहले से इस संकट की आशंका जता रही थी, तो क्या हमारी तैयारी पर्याप्त थी?
जरा सोचिये पिछले 5 राज्यों के चुनाव में कितना पेट्रोल डीजल खपत हुई होगी ! 
प्रधानमंत्री जी जो अपील आज कर रहे हैं वो चुनाव से पहले भी कर सकते थे ना? 
राजनीति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन जब जनता को लगता है कि उसकी रोज़मर्रा की समस्याएँ पीछे छूट रही हैं, तब असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। देशहित सिर्फ भाषणों और चुनावी मंचों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर उस फैसले और सरकार की प्राथमिकताओं में दिखना चाहिए जो सीधे आम नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है और संकट आने से पहले की तैयारी से साबित होता है।