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मेदिनीनगर नगर निगम बना नरक निगम: मूलभूत सुविधाएं नदारद, मेयर और अधिकारी रील-मेकअप में मस्त - अख्तर जमा


पलामू :
झारखंड के पलामू जिले का मेदिनीनगर नगर निगम इन दिनों अपनी बदहाली, प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियों में है। 'नाम बड़े और दर्शन छोटे' की कहावत यहां पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। एक तरफ जहां शहर की जनता मूलभूत नागरिक सुविधाओं के लिए दर-दर भटक रही है, वहीं दूसरी ओर निगम की मेयर अरुणा शंकर और प्रशासनिक अमला जनहित के कार्यों से बेपरवाह होकर सोशल मीडिया पर 'रील' बनाने और अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है। इन बदतर हालातों को देखते हुए स्थानीय लोग अब मेदिनीनगर नगर निगम को 'नरक निगम' कहने लगे हैं।
​नागरिक संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष अख्तर जमा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मेदिनीनगर नगर निगम की लचर कार्यशैली, मेयर अरुणा शंकर और उनके अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया है कि जब शहर की जनता नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है, तब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुंह मोड़ चुके हैं।
​अख्तर जमा के अनुसार:
​वीआईपी संस्कृति और उदासीनता: निगम कार्यालय में जनसुनवाई और जनता की समस्याओं के समाधान की बजाय वीआईपी संस्कृति हावी है। आम जनता अपने छोटे-छोटे कामों के लिए हफ्तों चक्कर काटने को विवश है, लेकिन अधिकारियों के पास जनता के लिए 'फुर्सत' नहीं है।
​एक ओर जहां शहरवासी जल-जमाव, पेयजल संकट और टूटी सड़कों से जूझ रहे हैं, वहीं निगम परिसर और दफ्तरों में कामकाज छोड़कर सोशल मीडिया के ट्रेंडिंग गानों पर वीडियो शूट करने का चलन बढ़ गया है।
​🏚️सुविधाओं के नाम पर शून्य, बदहाली की मार झेल रही जनता
​नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वार्डों में हालात बद से बदतर हो चुके हैं:
​सफाई व्यवस्था ध्वस्त: जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हैं और नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
​बुनियादी संकट: जलापूर्ति और स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य सुविधाएं भी पूरी तरह चरमरा गई हैं।
​अव्यवस्था का आलम: जल-जमाव और टूटी सड़कों के कारण स्थानीय नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।
​प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना बनी 'अवैध वसूली का अखाड़ा'
​मेदिनीनगर नगर निगम में भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर मामला प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना से जुड़ा है। गरीबों को पक्का मकान मुहैया कराने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना को यहां लूट का जरिया बना दिया गया है:
​रिश्वत के बिना फाइलें बंद: आरोप है कि बिना घूस दिए गरीबों की फाइलें आगे नहीं बढ़ती हैं।
​किस्त जारी करने पर अवैध वसूली: सूची में नाम जोड़ने और समय पर किस्त जारी करने के नाम पर बिचौलियों और निगम कर्मियों द्वारा खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है।
 इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार के चलते गरीब जनता आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार हो रही है।
​नागरिक संघर्ष मोर्चा के संयोजक अख्तर जमा और अन्य सामाजिक संगठनों ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि निगम प्रशासन ने अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार नहीं किया और भ्रष्टाचार तथा अवैध वसूली पर रोक नहीं लगाई, तो जनता चुप नहीं बैठेगी। शहरवासी इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।