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मेयर और डिप्टी मेयर के कमरों पर दस लाख खर्च करने पर सन्नी शुक्ला ने उठाए सवाल


प्रधानमंत्री आवास के लिए गरीब जनता 2 लाख रुपये पाने को निगम के दफ्तरों के चक्कर काटती है, लेकिन मेयर और डिप्टी मेयर के सिर्फ दो चैंबरों पर 10 लाख रुपये उड़ाना आखिर कहां का न्याय है? झामुमो नेता सन्नी शुक्ला ने मेयर और डिप्टी मेयर चैंबर के लिए निकाले गए 10 लाख रुपये के टेंडर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे फैसले लेने से पहले शहर की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। आज शहर पानी के संकट से जूझ रहा है, सड़कों पर गड्ढे भरे पड़े हैं, बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं, लेकिन जनता के टैक्स के पैसों से अपने आराम पर लाखों रुपये खर्च करना बेहद हास्यास्पद है।
जब पूरे आवास का फर्नीचर 2 लाख रुपये में तैयार हो सकता है और प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को सिर्फ 2 लाख रुपये मिलते हैं, तो आखिर एक कमरे में ऐसा क्या लगाया जाएगा कि 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं? नगर निगम के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इसका जवाब जनता को देना होगा। जनता टैक्स विकास के लिए देती है, किसी के आलीशान आरामगाह के लिए नहीं। प्रधानमंत्री फिजूलखर्ची रोकने के लिए बोल रहे हैं और यहां भाजपा के जनप्रतिनिधि द्वारा पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। नगर निगम के सभी पैंतीस माननीय पार्षदों से विनम्र आग्रह है कि वे जनता की आवाज़ बनें और जनता के टैक्स के पैसों को फिजूलखर्ची में बर्बाद करने जैसे प्रस्तावों पर बोर्ड में अपनी सहमति न दें। जनता ने आपको अपने वार्ड की सड़क, पानी, सफाई और अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए चुना है, न कि सत्ता के कमरों की सजावट पर मुहर लगाने के लिए। आज आवश्यकता है कि जनता की प्राथमिकताओं को आवाज़ दी जाए, क्योंकि कई बार खामोशी भी सहमति मानी जाती है।