बिरसा मुंडा के सपनों का ‘अबुआ राज’ आज भी अधूरा, इप्टा की सांस्कृतिक पाठशाला में गूंजे जल-जंगल-जमीन के सवाल
मेदिनीनगर : भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) द्वारा संचालित सांस्कृतिक पाठशाला की 98वीं कड़ी में रविवार को “बिरसा मुंडा के वैचारिक सवाल और वर्तमान” विषय पर संवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता और प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय के अधिकार जैसे मुद्दे आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने बिरसा मुंडा के समय में थे।
संवाद की अध्यक्षता इप्टा के जिला अध्यक्ष प्रेम भसीन और शैलेंद्र कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से की। विषय प्रवेश कराते हुए शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आज पूरी दुनिया अनेक तरह की चुनौतियों और परेशानियों से जूझ रही है। ऐसे समय में बिरसा मुंडा के विचारों और संघर्षों को याद करना बेहद जरूरी है, क्योंकि उनके विचार समाज को बेहतर और खुशहाल दिशा दे सकते हैं।
फिजियोथैरेपिस्ट कुलदीप राम ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता के सवाल आज भी गंभीर बने हुए हैं। बिरसा मुंडा ने इन्हीं मुद्दों के लिए संघर्ष करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। युवा कवि घनश्याम ने कहा कि बिरसा मुंडा भूमि अधिकार के बड़े पैरोकार थे। उनका मानना था कि जमीन पर अधिकार उसी का होना चाहिए जो उसे जोतता और उपजाता है। उन्होंने कहा कि आज बढ़ते भूमि अधिग्रहण के दौर में बिरसा के विचारों को जीवित रखने की जरूरत है।
मजदूर आंदोलन से जुड़े जेम्स हेरेंज ने कहा कि बिरसा मुंडा का सबसे महत्वपूर्ण सपना “अबुआ राज” यानी अपना शासन था। वे प्राकृतिक संसाधनों पर समुदाय के अधिकार की बात करते थे, जबकि आज इन संसाधनों पर कॉरपोरेट नियंत्रण बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं।
ड्रग एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय शर्मा ने बिरसा मुंडा को संघर्ष का प्रतीक बताया। वहीं अच्छे लाल प्रजापति ने कहा कि जल-जंगल पर अधिकार का सवाल आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इप्टा के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष विदेशी शासकों के खिलाफ था, लेकिन आज आम लोगों को अपने ही समाज के भीतर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान समय में बिरसा मुंडा के विचारों को नए तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव केडी सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा के विचारों और संघर्ष की विरासत को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ऐसे संवाद लगातार आयोजित होने चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रेम भसीन ने सांस्कृतिक पाठशाला की आगामी 100वीं कड़ी के आयोजन को लेकर सुझाव दिए। धन्यवाद ज्ञापन के साथ शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कार्यक्रम का समापन किया।
इस अवसर पर शशि पांडे, जगतपाल कुमार, संजीव कुमार ‘संजू’, मोहम्मद मन्नू, मोहम्मद इरशाद, प्रभात कुमार सिंह, रविशंकर सहित कई लोग उपस्थित थे।





