छतरपुर : प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश अमृतकाल की ओर बढ़ने का दावा कर रहा है। आधुनिक एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, रेलवे का विस्तार हो रहा है, डिजिटल इंडिया की चर्चा हो रही है और विकास की नई इबारत लिखे जाने की बातें हो रही हैं। लेकिन पलामू लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छतरपुर अनुमंडल के लाखों नागरिक आज भी एक बुनियादी प्रश्न पूछ रहे हैं—आखिर हमारे हिस्से का विकास कहाँ है?
छतरपुर को अनुमंडल बने वर्षों बीत गए। कई बार सांसद चुने गए, विधायक चुने गए, सरकारें बदलीं, योजनाएं बनीं और घोषणाएं हुईं, लेकिन क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताएं आज भी अधूरी हैं। विकास का अर्थ केवल सड़क, गली और नाली निर्माण नहीं होता। वास्तविक विकास वह होता है जो लोगों के जीवन स्तर को बदल दे, रोजगार पैदा करे, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए, शिक्षा को मजबूत करे और नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दे।
आज भी छतरपुर में ब्लड बैंक नहीं है। ट्रॉमा सेंटर नहीं है। पोस्टमार्टम हाउस नहीं है। निबंधन कार्यालय नहीं है। जेल नहीं है। अनुमंडलीय अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक, विशेषज्ञ डॉक्टर और संसाधन नहीं हैं। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है और कई बार रास्ते में ही जिंदगी हार जाती है।
बाजार का विस्तार वर्षों से लंबित है। बस स्टैंड, टेंपो स्टैंड, टाउन हॉल, आधुनिक पार्क, स्टेडियम और स्थानीय डैमों के सौंदर्यीकरण जैसी योजनाएं फाइलों और भाषणों तक सीमित हैं। बिजली की स्थायी व्यवस्था आज भी सपना बनी हुई है।
सबसे बड़ी चिंता युवाओं की है। रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण क्षेत्र का युवा पलायन करने को विवश है। उद्योग-धंधों की स्थापना की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रयास दिखाई नहीं देता। यदि रोजगार नहीं होगा तो विकास के बड़े-बड़े दावे आम लोगों के लिए केवल शब्द बनकर रह जाएंगे।
आज छतरपुर की जनता सांसद, विधायक और प्रशासन से जवाब चाहती है। आखिर अनुमंडल मुख्यालय होने के बावजूद वे कौन-सी बाधाएं हैं जिनके कारण छतरपुर को उसकी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं? क्या जनता केवल चुनाव के समय याद करने की वस्तु है या फिर विकास की योजनाओं में उसकी भी कोई हिस्सेदारी है?
छतरपुर की जनता किसी विशेष व्यक्ति या दल का विरोध नहीं कर रही। वह केवल अपने अधिकारों की मांग कर रही है। वह मांग कर रही है बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की, रोजगार की, उद्योगों की, खेल सुविधाओं की और आधुनिक नागरिक व्यवस्था की।
समय आ गया है कि छतरपुर के विकास के लिए एक स्पष्ट रोडमैप बने और उसकी समयबद्ध मॉनिटरिंग हो। क्योंकि अब जनता को आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए। छतरपुर को प्रतीक्षा नहीं, विकास चाहिए।






