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बंदुआ गांव में महिलाओं को किया जागरूक, प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने का दिया संदेश


पलामू। हाल के दिनों में दहेज उत्पीड़न और महिलाओं के साथ बढ़ रही हिंसा की घटनाओं को लेकर मातृत्व संघ, पलामू की टीम ने बंदुआ गांव में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने तथा आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया गया।
संस्था की संस्थापक पूजा रत्नाकर (धनबाद) ने कहा कि महिलाओं को किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं सहना चाहिए, लेकिन अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों को ससुराल को अपना घर मानना चाहिए, वहीं किसी भी तरह की प्रताड़ना का खुलकर विरोध भी करना चाहिए।
मातृत्व संघ की पलामू अध्यक्षा शर्मिला वर्मा ने कहा कि बेटी की शादी के बाद माता-पिता को पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो जाना चाहिए। समय-समय पर बेटी की कुशलक्षेम लेते रहना चाहिए और यदि किसी प्रकार की प्रताड़ना की जानकारी मिले तो उसे अपने घर लाने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज क्या कहेगा, इस डर से बेटी की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उपसचिव रानू सिन्हा ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं। बेटियों को शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में वे स्वयं अपना जीवन सम्मानपूर्वक जी सकें।
कार्यक्रम में अधिवक्ता सुधा पांडे ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए कई कानून मौजूद हैं। उन्होंने पॉक्सो एक्ट, फैमिली कोर्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और कहा कि किसी भी समस्या से हार मानकर गलत कदम नहीं उठाना चाहिए। न्यायालय के द्वार हमेशा खुले हैं और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
संघ की कोऑर्डिनेटर मंजू चंद्रा ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार भी प्रतिबद्ध है। किसी भी परेशानी की स्थिति में पुलिस, प्रशासन या सामाजिक संगठनों की सहायता लेने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।
शिक्षिका रीता सिन्हा ने कहा कि बेटा और बेटी दोनों समान हैं। बेटियों को भरपूर शिक्षा, आत्मविश्वास और अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे किसी भी प्रकार के अत्याचार का सामना कर सकें।
इस अवसर पर बंदुआ पंचायत परिषद की सदस्य सरिता देवी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता अभियान सभी पंचायतों में आयोजित होने चाहिए, जिससे महिलाएं और बच्चियां अपने अधिकारों को पहचान सकें और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न का डटकर मुकाबला कर सकें।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बंदुआ गांव के मुखिया दीनानाथ मांझी, छात्र नेता विनीत पांडे सहित ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चियों ने भाग लिया।