रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने एक नाबालिग को कथित तौर पर बालिग बताकर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि उनके बेटे की वास्तविक जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है और सितंबर 2026 में उसकी उम्र 17 वर्ष थी। इसके बावजूद पुलिस और अन्य दस्तावेजों में उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज की गई। मामले में बच्चे के पिता फिरोज अंसारी की ओर से हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके बेटे को 4 सितंबर 2026 से हिरासत में रखा गया और बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 21 सितंबर को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत के सामने ऐसे दस्तावेज रखे गए जिनमें बच्चे की उम्र 8 सितंबर को गिरफ्तारी के समय 19 वर्ष बताई गई थी। कोर्ट के सामने यह भी आया कि मेडिकल फिटनेस से जुड़े रिकॉर्ड में भी उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज थी। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि बच्चे की जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है। इसके समर्थन में आधार कार्ड समेत उम्र से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए गए। इस आधार पर याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि 4 सितंबर को हिरासत में लिए जाने के समय बच्चा नाबालिग था। हाईकोर्ट ने इसी बिंदु पर रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा कि आखिर किस आधार और किस प्राधिकरण के तहत उसकी उम्र 19 वर्ष निर्धारित की गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तारीखों पर ओवरराइटिंग और कथित हेरफेर को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों में तारीखों को लेकर ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है, जिसकी जांच आवश्यक है। हाईकोर्ट ने इस मामले में रांची के न्यायायुक्त से रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दस्तावेजों में तारीखों को लेकर क्या हुआ और संबंधित रिकॉर्ड किस परिस्थिति में तैयार किए गए। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानने के लिए डोरंडा थाना परिसर का CCTV फुटेज मांगा कि बच्चे को कब और किस परिस्थिति में हिरासत में लिया गया था। लेकिन थाना प्रभारी ने अदालत को बताया कि थाने के कैमरे खराब हैं। CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने की जानकारी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने रांची के एसएसपी को निर्देश दिया कि जिले के सभी थानों में लगे CCTV कैमरों की तत्काल जांच कराई जाए और जहां कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाए। अदालत के निर्देश का उद्देश्य केवल इस मामले की जांच तक सीमित नहीं है। थानों में CCTV रिकॉर्डिंग पुलिस की गतिविधियों की निगरानी और हिरासत से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में काम कर सकती है। हाईकोर्ट ने इसलिए रांची जिले के सभी थानों में CCTV की स्थिति की जांच और खराब उपकरणों को जल्द ठीक कराने को कहा है। इसी दौरान राज्य के पुलिस थानों में CCTV लगाने और उन्हें चालू रखने से जुड़े पुराने न्यायिक निर्देशों के पालन का मुद्दा भी हाईकोर्ट के सामने आया। 24 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने राज्य में CCTV संबंधी आदेशों के अनुपालन को लेकर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई और मुख्य सचिव, गृह सचिव तथा डीजीपी के स्तर पर जवाबदेही का मुद्दा उठाया। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित बताई गई है। भारत में बच्चों से जुड़े मामलों में कानून की प्रक्रिया वयस्क आरोपियों से अलग होती है। इसलिए किसी व्यक्ति की सही उम्र निर्धारित करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति वास्तव में नाबालिग है, तो उसके मामले में किशोर न्याय व्यवस्था के तहत अलग प्रक्रिया लागू होती है। इसी वजह से इस मामले में उम्र से जुड़े दस्तावेज और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया हाईकोर्ट की जांच के केंद्र में आ गई है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब और रिपोर्ट मांगी है। आगे की सुनवाई में अदालत यह देख सकती है कि बच्चे की उम्र निर्धारित करने के लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, उनमें दर्ज तारीखों में बदलाव कैसे आया और पुलिस हिरासत से संबंधित CCTV रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं था। इस मामले में अभी दस्तावेजों में कथित हेरफेर को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे अदालत के सामने उठे आरोप और जांच का विषय माना जा रहा है। आगे की न्यायिक कार्यवाही और अधिकारियों की रिपोर्ट से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। रांची के इस मामले ने एक साथ दो महत्वपूर्ण सवालों को सामने ला दिया है—पहला, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की उम्र का सही निर्धारण और दूसरा, पुलिस थानों में CCTV जैसी निगरानी व्यवस्था का प्रभावी संचालन। हाईकोर्ट ने दोनों पहलुओं पर अधिकारियों से जवाब और जांच रिपोर्ट मांगी है। अब नजर अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट और अगली सुनवाई पर रहेगी। कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और ताजा रिपोर्टों के तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों और नए वाक्य-विन्यास में तैयार किया गया है। इसे किसी समाचार स्रोत की लाइन-दर-लाइन कॉपी नहीं किया गया है। फोटो, वीडियो और अन्य मीडिया सामग्री के अधिकार अलग से जांचना आवश्यक है।हाईकोर्ट में कैसे पहुंचा मामला?
जन्मतिथि को लेकर सामने आया विवाद
दस्तावेजों में ओवरराइटिंग पर अदालत की नजर
डोरंडा थाने के CCTV ने बढ़ाई चिंता
CCTV को लेकर हाईकोर्ट का जोर
पहले से जारी CCTV व्यवस्था पर भी सवाल
नाबालिग होने पर क्यों बदल जाती है कानूनी प्रक्रिया?
अब आगे क्या होगा?
निष्कर्ष
17 साल के नाबालिग को 19 साल का बताकर जेल भेजने का मामला, झारखंड हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और CCTV पर उठाए गंभीर सवाल






