रांची। झारखंड में शिक्षा व्यवस्था से छूटे बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक विशेष सर्वेक्षण अभियान शुरू करने जा रही है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) की ओर से संचालित इस अभियान के तहत राज्यभर में ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जो कभी स्कूल नहीं गए या किसी कारणवश बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं। स्कूलों के दोबारा खुलने के बाद 10 नवंबर से सर्वेक्षण की शुरुआत होगी। इस अभियान में 3 से 18 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया जाएगा। सर्वेक्षण अभियान के दौरान सरकारी स्कूलों के शिक्षक और संबंधित कर्मी अपने निर्धारित क्षेत्रों में घर-घर जाकर बच्चों की शैक्षणिक स्थिति की जानकारी जुटाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य उन बच्चों तक पहुंचना है, जो आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक या अन्य कारणों से शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो गए हैं। शिक्षक अभिभावकों से बातचीत कर यह पता लगाएंगे कि उनके परिवार में कितने बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हैं। इनमें कितने बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं और कितने ऐसे हैं जिन्होंने अब तक दाखिला नहीं लिया है या पढ़ाई बीच में छोड़ दी है। इस अभियान का दायरा व्यापक रखा गया है। इसमें तीन से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया जाएगा। सर्वेक्षण के माध्यम से अलग-अलग आयु समूहों के उन बच्चों की पहचान की जाएगी, जिन्हें अब तक औपचारिक शिक्षा से नहीं जोड़ा जा सका है। विशेष रूप से ऐसे बच्चों पर ध्यान दिया जाएगा, जो स्कूल में नामांकन नहीं होने, पारिवारिक परिस्थितियों, आर्थिक परेशानियों, पलायन या अन्य कारणों से पढ़ाई से वंचित रह गए हैं। अभियान के तहत जुटाई गई जानकारी को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा। इसके लिए DAHAR 2.0 पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। शिक्षक और संबंधित अधिकारी सर्वेक्षण में सामने आने वाले बच्चों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करेंगे। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से शिक्षा विभाग को यह पता लगाने में आसानी होगी कि राज्य के किन क्षेत्रों में कितने बच्चे स्कूलों से बाहर हैं। इसके आधार पर बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे। सर्वेक्षण केवल बच्चों की संख्या जुटाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से यह समझने का प्रयास भी किया जाएगा कि बच्चे शिक्षा से दूर क्यों हैं। कई बार गरीबी, अभिभावकों की आर्थिक स्थिति, परिवार का दूसरे स्थान पर पलायन, बाल श्रम, घरेलू जिम्मेदारियां और स्कूल तक पहुंचने में कठिनाई जैसी परिस्थितियों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे मामलों की पहचान होने पर संबंधित विभाग बच्चों को उनकी उम्र और शैक्षणिक स्थिति के अनुसार शिक्षा से जोड़ने की दिशा में पहल कर सकते हैं। झारखंड में स्कूल छोड़ने वाले और कभी विद्यालय नहीं पहुंच पाने वाले बच्चों की पहचान करना शिक्षा विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रही है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्कूलों से बाहर बच्चों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। इससे नामांकन बढ़ाने, बच्चों को दोबारा विद्यालय भेजने और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। JEPC की ओर से प्रस्तावित यह विशेष सर्वेक्षण 10 नवंबर से शुरू किया जाएगा। अभियान के सफल संचालन के लिए शिक्षकों और संबंधित कर्मियों की भूमिका अहम होगी। घर-घर जाकर जानकारी जुटाने के साथ-साथ उसका सही तरीके से डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना भी जरूरी होगा। कुल मिलाकर, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद का यह अभियान स्कूलों से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सर्वेक्षण कितनी व्यापकता और सटीकता के साथ पूरा किया जाता है तथा चिह्नित बच्चों को वास्तव में स्कूलों से कैसे जोड़ा जाता है।घर-घर पहुंचेंगे शिक्षक, जुटाएंगे बच्चों की जानकारी
3 से 18 वर्ष तक के बच्चे होंगे सर्वे में शामिल
DAHAR 2.0 पोर्टल पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा
स्कूल छोड़ने के कारणों की भी होगी पहचान
शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर
10 नवंबर से शुरू होगा अभियान
झारखंड में 10 नवंबर से स्कूलों से बाहर बच्चों की तलाश के लिए विशेष अभियान, शिक्षक घर-घर जाकर करेंगे सर्वे; DAHAR 2.0 पोर्टल पर दर्ज होगा डेटा






