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परीक्षा माफिया अभय तिवारी की जमानत पर आंशिक सुनवाई, 1 अक्टूबर को अगली सुनवाई


रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामले में जेल में बंद अभय तिवारी की जमानत याचिका पर गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को रांची की अदालत में आंशिक सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके बाद अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।

22 जुलाई से न्यायिक हिरासत में है अभय तिवारी

अभय तिवारी JSSC-CGL 2024 पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितता से जुड़े CID कांड संख्या 01/2025 में न्यायिक हिरासत में है। रिपोर्ट के मुताबिक, CID ने उसे 22 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था और तब से वह जेल में है।

तिवारी ने जमानत के लिए 28 अगस्त को अदालत में याचिका दाखिल की थी। गुरुवार को इसी याचिका पर अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

JSSC-CGL मामले में क्या है आरोप?

JSSC-CGL परीक्षा से जुड़े मामले में जांच एजेंसी ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक से संबंधित आरोपों की जांच की है। अभय तिवारी की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी की ओर से अदालत में क्या-क्या सामग्री रखी गई है, इसका अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों को फिलहाल जांच एजेंसी के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने तक आरोपी को दोषी नहीं माना जाता।

दूसरे परीक्षा घोटाले में भी आरोपी

अभय तिवारी के खिलाफ JPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और परीक्षा परिणाम में हेरफेर से जुड़ा एक अलग मामला भी चल रहा है। उस मामले में उसकी जमानत याचिका 9 सितंबर 2026 को अदालत ने खारिज कर दी थी।

उस मामले में CID ने आरोप लगाया था कि तिवारी ने परीक्षा प्रक्रिया में मध्यस्थ और सुविधा उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाई। जांच एजेंसी ने अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेने, OMR शीट में हेरफेर और उत्तरपुस्तिकाओं से जुड़ी अनियमितताओं जैसे आरोप भी अदालत के सामने रखे थे।

जांच में वित्तीय लेन-देन का भी जिक्र

सितंबर में हुई पिछली जमानत सुनवाई के दौरान CID की ओर से केस डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन और तिवारी के TDPL से जुड़े होने का उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसी ने उसके बैंक खातों, TDPL से जुड़े लोगों और कुछ अभ्यर्थियों के साथ संपर्क को भी जांच का हिस्सा बताया था।

अदालत ने उस मामले में यह माना था कि जांच के दौरान उसके खिलाफ परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर से संबंधित प्रथमदृष्टया सामग्री मौजूद है, जिसके आधार पर उस मामले में जमानत नहीं दी गई।

पत्नी और भाई का नाम भी जांच में

सितंबर में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी का नाम भी संबंधित परीक्षा गड़बड़ी की जांच में सामने आया है। दोनों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, अलग-अलग मामलों और आरोपों को एक-दूसरे से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा; प्रत्येक मामले की अपनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया है।

अब 1 अक्टूबर पर नजर

24 सितंबर की सुनवाई के बाद अब अभय तिवारी की JSSC-CGL से जुड़े मामले में जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी। उस दिन अदालत जमानत से जुड़े पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर आगे विचार करेगी।

इस मामले में अंतिम फैसला अदालत की आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। फिलहाल अभय तिवारी न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ लगे आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

कॉपीराइट नोट: यह खबर उपलब्ध अदालती जानकारी और ताजा रिपोर्टों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों और नए वाक्य-विन्यास में तैयार की गई है। इसे किसी स्रोत की लाइन-दर-लाइन कॉपी नहीं किया गया है। फोटो, वीडियो और अन्य मीडिया सामग्री के अधिकार अलग से जांचना आवश्यक है।