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झारखंड के लंबित कोयला रॉयल्टी बकाये पर याचिका कोयला मंत्रालय को भेजी गई


झारखंड के लंबित कोयला रॉयल्टी बकाये की राशि जारी कराने हेतु राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका केंद्रीय कोयला मंत्रालय को अग्रेषित
झारखंड राज्य के लंबित कोयला रॉयल्टी बकाये के भुगतान के संबंध में भारत की राष्ट्रपति महामहिम को भेजी गई एक महत्वपूर्ण याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए मामले को आवश्यक कार्रवाई एवं उचित ध्यानाकर्षण हेतु भारत सरकार के कोयला मंत्रालय को अग्रेषित कर दिया है। राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से अवर सचिव श्री अशोक कुमार द्वारा जारी पत्र में संबंधित प्राधिकारी से याचिका पर की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
यह याचिका  रामगढ के सरकारी अधिवक्ता श्री संजीव कुमार Ambastha द्वारा 17 मार्च 2026 को राष्ट्रपति महोदया को प्रेषित  किया गया था। याचिका में झारखंड राज्य को कोयला रॉयल्टी मद में लंबित लगभग ₹1.36 लाख करोड़ की राशि जारी कराने हेतु संवैधानिक एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि झारखंड देश के सबसे अधिक खनिज संपन्न राज्यों में से एक है और राष्ट्रीय कोयला उत्पादन तथा ऊर्जा सुरक्षा में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य देश की औद्योगिक और ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में निरंतर योगदान देता रहा है, बावजूद इसके राज्य को वित्तीय संसाधनों की कमी एवं विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में उल्लेख किया गया है कि यदि लंबित कोयला रॉयल्टी बकाये की राशि समय पर राज्य को प्राप्त होती है तो इससे झारखंड में आधारभूत संरचना विकास, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक कल्याण योजनाओं को नई गति मिलेगी। साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों के विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी।
याचिका में संघवाद की भावना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारतीय संविधान केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित वित्तीय संबंधों की परिकल्पना करता है। राज्यों के वैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा संघीय ढांचे की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसी संदर्भ में राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध किया गया कि वे भारत सरकार तथा वित्त आयोग को इस मामले की समीक्षा करने एवं संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने हेतु निर्देशित करने पर विचार करें।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 246, 270, 275, 280 तथा 294 से 297 तक के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि राज्यों के राजस्व एवं प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित अधिकारों की रक्षा संविधान की मूल भावना के अनुरूप है। झारखंड को उसका वैध वित्तीय अधिकार मिलना न केवल आर्थिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा बल्कि यह भारतीय संघीय व्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगा।
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा मामले को भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव श्री अनिल जैन को अग्रेषित किए जाने को इस मुद्दे पर सकारात्मक प्रशासनिक पहल माना जा रहा है। याचिकाकर्ता ने आशा व्यक्त की है कि केंद्र सरकार एवं संबंधित विभाग इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए झारखंड के हित में आवश्यक निर्णय लेंगे।