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झारखंड में बड़े निवेश की तैयारी, स्टील से AI और पर्यटन तक कई MoU


रांची। झारखंड में औद्योगिक और तकनीकी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में जुलाई 2026 में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के दौरान राज्य सरकार ने उद्योग, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में कंपनियों के साथ निवेश प्रस्तावों पर समझौते किए। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 9 जुलाई को हुए प्रमुख समझौतों का प्रस्तावित निवेश मूल्य करीब ₹99,639 करोड़ बताया गया।

14 MoU से निवेश प्रस्ताव

राष्ट्रीय हितधारक परामर्श के समापन चरण में झारखंड सरकार ने कुल 14 Memorandum of Understanding यानी MoU पर हस्ताक्षर किए। इनमें स्टील, पावर, खनन, सीमेंट, विनिर्माण, डिजिटल तकनीक और पर्यटन जैसे अलग-अलग क्षेत्र शामिल रहे। सरकार का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ नई तकनीक और सेवा क्षेत्र के निवेश को भी बढ़ाना है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि MoU में घोषित राशि प्रस्तावित निवेश होती है, जिसे सीधे तत्काल जमीन पर उतर चुका निवेश नहीं माना जा सकता। परियोजनाओं को वास्तविक रूप देने के लिए आगे भूमि, अनुमति, वित्तीय मंजूरी, तकनीकी तैयारी और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं।

जिंदल समूह से बड़े प्रस्ताव

निवेश प्रस्तावों में जिंदल समूह से जुड़े समझौते प्रमुख रहे। रिपोर्ट के अनुसार Jindal Steel Limited ने ₹40,000 करोड़ और Jindal Nuclear Power Private Limited ने ₹30,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा Jindal Renewable से जुड़े निवेश का भी उल्लेख किया गया है।

इन प्रस्तावों से झारखंड के पारंपरिक खनिज और औद्योगिक आधार के साथ ऊर्जा तथा नई औद्योगिक तकनीकों को जोड़ने की संभावना बनती है।

रूंगटा समूह के प्रस्ताव

स्टील और खनन क्षेत्र में Rungta Sons Private Limited तथा Rungta Mines Limited के साथ भी समझौते हुए। उपलब्ध विवरण के मुताबिक इनसे क्रमशः करीब ₹10,000 करोड़ और ₹3,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव जुड़े हैं।

झारखंड लंबे समय से लौह अयस्क, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों के कारण देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में रहा है। ऐसे निवेश प्रस्ताव राज्य की मौजूदा औद्योगिक क्षमता के विस्तार से जुड़े हो सकते हैं।

टाटा स्टील की नई परियोजनाओं पर जोर

Tata Steel से जुड़े प्रस्तावों में नई आयरनमेकिंग तकनीक और टिनप्लेट विस्तार शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार लगभग ₹7,000 करोड़ का प्रस्तावित निवेश HISARNA तकनीक से जुड़ा है, जबकि टिनप्लेट विस्तार के लिए करीब ₹2,600 करोड़ का प्रस्ताव बताया गया है।

इससे पहले जनवरी 2026 में झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच नई पीढ़ी की ग्रीन स्टील तकनीकों को लेकर भी निवेश की रूपरेखा सामने आई थी। सरकार के अनुसार इसमें HISARNA और EASyMelt जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर है।

सीमेंट और अन्य विनिर्माण क्षेत्र

औद्योगिक विस्तार के दायरे में Ambuja Cement का नाम भी शामिल है। उपलब्ध निवेश सूची के मुताबिक कंपनी के साथ लगभग ₹1,000 करोड़ के प्रस्तावित निवेश का उल्लेख किया गया। वहीं Amalgam Steel and Power Limited के लिए करीब ₹4,980 करोड़ तथा Varun Beverages से लगभग ₹409 करोड़ के प्रस्ताव की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।

इस तरह निवेश का फोकस केवल भारी उद्योगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विनिर्माण और उपभोक्ता क्षेत्र तक भी विस्तार दिखाई देता है।

AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अलग रणनीति

जुलाई में हुई बैठकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Artificial Intelligence, Digital Governance और IT Infrastructure रहा। झारखंड सरकार ने Google, Microsoft, IBM, AWS, Oracle और अन्य तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ संभावित साझेदारी पर चर्चा की।

Microsoft के साथ सरकारी विभागों के डेटा को एकीकृत करने वाले AI आधारित डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य डेटा आधारित निर्णय लेने, सरकारी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और डेटा गवर्नेंस को मजबूत करना बताया गया।

IBM ने खनन, स्वास्थ्य, बैंकिंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए AI समाधान पर चर्चा की और कुछ क्षेत्रों में Proof of Concept की पेशकश की। AWS के साथ क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, AI आधारित डेटा एकीकरण, डिजिटल गवर्नेंस और निर्णय-सहायक डैशबोर्ड जैसे विषयों पर विचार हुआ।

Google के साथ AI स्किलिंग की संभावना

Google के साथ बातचीत में AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन सेवाओं, भाषा तकनीक और डिजिटल स्किलिंग पर चर्चा हुई। सरकारी जानकारी के अनुसार, K-12 शिक्षकों के लिए AI प्रशिक्षण और प्रमाणन कार्यक्रम की संभावना पर भी विचार किया गया।

इसका मतलब यह है कि राज्य की निवेश रणनीति केवल कारखाने और भारी उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है। सरकार डिजिटल कौशल, AI और तकनीकी मानव संसाधन को भी भविष्य की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है।

पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश की कोशिश

झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को भी इन समझौतों में जगह मिली। सरकार ने पर्यटन कंपनियों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के साथ साझेदारी के जरिए राज्य में पर्यटक सुविधाओं और पर्यटन प्रचार को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। Tata Motors के साथ माइनिंग टूरिज्म तथा EaseMyTrip के साथ पर्यटन प्रचार और विजिटर आउटरीच से संबंधित सहयोग का उल्लेख किया गया है।

सरकार की योजना पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय औद्योगिक और खनन विरासत से भी जोड़ने की दिखाई देती है।

निवेश से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

यदि प्रस्तावित परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो इनके निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। औद्योगिक परियोजनाओं के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, कौशल प्रशिक्षण, स्थानीय सेवाओं और छोटे कारोबारों में भी मांग बढ़ सकती है।

हालांकि, निवेश प्रस्ताव और वास्तविक परियोजना के बीच कई चरण होते हैं। इसलिए अभी इन आंकड़ों को प्रस्तावित निवेश के रूप में देखना ज्यादा उचित है। परियोजनाओं के धरातल पर आने की स्थिति अलग-अलग कंपनियों और क्षेत्रों के अनुसार बदल सकती है।

सरकार का 'माइंस से माइंड्स' पर जोर

नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के दौरान राज्य सरकार ने झारखंड को केवल खनिज संसाधनों पर निर्भर अर्थव्यवस्था के बजाय रिसर्च, इनोवेशन, AI और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने की बात रखी। इसी कार्यक्रम में AI Policy, Investment Promotion Policy, Tourism Policy, Textile Policy और PPP Policy जैसे प्रस्तावित नीति ढांचों पर उद्योग जगत से सुझाव भी लिए गए।

आगे की चुनौती क्या होगी?

झारखंड के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चरण इन MoU को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना होगा। इसके लिए जमीन, पर्यावरणीय और अन्य वैधानिक मंजूरियां, बिजली-पानी जैसी आधारभूत सुविधाएं, निवेश की वित्तीय व्यवस्था और परियोजनाओं की समयसीमा अहम भूमिका निभाएंगी।

साथ ही सरकार को यह भी देखना होगा कि बड़े निवेश के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, कौशल विकास और छोटे कारोबारों को अवसर किस तरह मिलते हैं।

निष्कर्ष

जुलाई 2026 की निवेश पहल से झारखंड में स्टील, खनन, ऊर्जा, सीमेंट, डिजिटल तकनीक, AI और पर्यटन को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति सामने आई है। 14 प्रमुख MoU में लगभग ₹99,639 करोड़ के प्रस्तावित निवेश की जानकारी सामने आई। अब इन समझौतों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रस्तावित परियोजनाएं कितनी तेजी से मंजूर होकर जमीन पर उतरती हैं।

कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध स्रोतों के तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों और नए वाक्य-विन्यास में तैयार किया गया है। इसे किसी प्रकाशित रिपोर्ट की लाइन-दर-लाइन नकल के रूप में नहीं लिखा गया है। समाचार के साथ इस्तेमाल होने वाली तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स के अधिकार अलग हो सकते हैं।