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मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर देशभर में भाजपा का प्रदर्शन, प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी टिप्पणी पर मांगी माफी


नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर देश की राजनीति में विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बयान के विरोध में विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन किए और खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। भाजपा नेताओं ने टिप्पणी को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। वहीं, कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष के बयान का बचाव करते हुए इसे कार्यक्रम के दौरान हुई कथित नोकझोंक के संदर्भ में देखने की बात कही है।

पटना के कार्यक्रम में शुरू हुआ विवाद

यह विवाद बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। यह कार्यक्रम बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हिस्सा लिया और अपने संबोधन में केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर निशाना साधा।

कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं में से एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी के संबंध में टिप्पणी की। इसके जवाब में खड़गे ने ऐसी बात कही, जिसे भाजपा ने प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताया। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया और भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष से माफी की मांग शुरू कर दी।

भाजपा ने कई राज्यों में किया विरोध प्रदर्शन

खड़गे की टिप्पणी के विरोध में भाजपा ने 26 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया। दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आवास के पास प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी माफी मांगने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।

ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में भी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान खड़गे और राहुल गांधी के पुतले जलाए गए। पार्टी नेताओं ने कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद सार्वजनिक मंच से इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

बिहार के पटना सहित अन्य स्थानों पर भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर नाराजगी जताई। विभिन्न राज्यों में हुए इन प्रदर्शनों से स्पष्ट हुआ कि यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच व्यापक राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।

भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर साधा निशाना

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना अनुचित है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों, फैसलों और कामकाज की आलोचना की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से राजनीतिक संवाद का स्तर प्रभावित होता है।

भाजपा नेताओं ने खड़गे से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की। पार्टी के कई नेताओं ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को सरकार का विरोध नीतिगत मुद्दों और तथ्यों के आधार पर करना चाहिए।

भाजपा ने इस विवाद को कांग्रेस की राजनीतिक भाषा और नेतृत्व की कार्यशैली से जोड़ते हुए सवाल उठाए। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक बयान हैं और इन्हें संबंधित पक्ष के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस ने क्या सफाई दी?

कांग्रेस ने खड़गे के बयान का बचाव करते हुए कहा कि घटना को उसके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी है। पार्टी नेता पवन खेड़ा के अनुसार, पटना में भाषण के दौरान खड़गे को बीच में टोका गया था और उनके प्रति अभद्र व्यवहार किया गया था। कांग्रेस का दावा है कि विवादित जवाब उसी घटनाक्रम के दौरान दिया गया।

कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि खड़गे की टिप्पणी को आरएसएस की विचारधारा और उसके वैचारिक प्रभाव के संदर्भ में समझा जाना चाहिए। पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह घटना के एक हिस्से को सामने रखकर राजनीतिक विवाद बढ़ा रही है।

इस तरह भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस घटना को लेकर अपना-अपना पक्ष रखा है। भाजपा जहां टिप्पणी को प्रधानमंत्री के परिवार के प्रति अपमानजनक बता रही है, वहीं कांग्रेस ने कार्यक्रम के दौरान हुई कथित नोकझोंक को अपने बचाव का आधार बनाया है।

राजनीतिक बयानबाजी क्यों बढ़ी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की नीतियों, संवैधानिक संस्थाओं और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर सवाल उठाती रही है। दूसरी ओर, भाजपा कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों को राजनीतिक मर्यादा से जोड़ती रही है।

खड़गे के बयान के बाद दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। भाजपा ने माफी की मांग को प्रमुखता दी है, जबकि कांग्रेस ने अपने अध्यक्ष के बयान का संदर्भ सामने रखा है।

इस विवाद के बीच राजनीतिक भाषा, सार्वजनिक जीवन में शालीनता और विरोध की सीमाओं को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए यह मुद्दा इस बात का उदाहरण है कि नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियां किस तरह राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल इस विवाद का केंद्र खड़गे की टिप्पणी और भाजपा की ओर से मांगी जा रही माफी है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस अध्यक्ष या पार्टी इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और दोनों दल इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

निष्कर्ष: मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित टिप्पणी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। भाजपा सार्वजनिक माफी की मांग पर कायम है, जबकि कांग्रेस घटना के संदर्भ को सामने रखकर अपने अध्यक्ष का बचाव कर रही है। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के बयानों और घटनाक्रम को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।