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ओडिशा के जंगल में मिले पांच नन्हे Orangutan, भारत में विदेशी वन्यजीव तस्करी को लेकर जांच तेज


बालासोर, ओडिशा, 18 सितंबर 2026: ओडिशा के बालासोर जिले के एक जंगल में पांच बेहद छोटे Orangutan मिलने के बाद वन्यजीव अधिकारियों के सामने उनकी भारत में मौजूदगी का रहस्य खड़ा हो गया है। 8 सितंबर को Bichitrapur क्षेत्र में मिले इन जानवरों को वन विभाग ने सुरक्षित निकालकर Nandankanan Zoological Park, Bhubaneswar भेजा, जहां उन्हें क्वारंटीन में रखा गया है।

भारत में प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते Orangutan

Orangutan दक्षिण-पूर्व एशिया के मूल निवासी हैं और वर्तमान में मुख्य रूप से Borneo और Sumatra में पाए जाते हैं। भारत में इनके प्राकृतिक जंगलों में पाए जाने का कोई सामान्य रिकॉर्ड नहीं है। इसलिए बालासोर के तटीय इलाके में पांच juveniles का एक साथ मिलना वन्यजीव अधिकारियों के लिए असाधारण घटना है।

वन अधिकारियों के मुताबिक, इन जानवरों का स्थानीय जंगल तक स्वाभाविक रूप से पहुंचना बेहद असंभावित है, क्योंकि उनके प्राकृतिक आवास और बालासोर के बीच कोई ऐसा वन्यजीव कॉरिडोर नहीं है जो इस तरह के आवागमन को संभव बनाए। इसी वजह से इनके भारत पहुंचने के तरीके की जांच की जा रही है।

संभावित अंतरराष्ट्रीय तस्करी की जांच

पांचों Orangutan के मिलने के बाद Odisha Police की Special Task Force (STF) और Wildlife Crime Control Bureau (WCCB) ने मामले की जांच शुरू की। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जानवर भारत में कब और किस रास्ते से पहुंचे तथा उन्हें जंगल में किसने छोड़ा।

जांचकर्ताओं ने Odisha और आसपास के इलाकों की CCTV फुटेज खंगाली है। रिपोर्टों के अनुसार, एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई है और संभावित transit route का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति की संलिप्तता अदालत या जांच के अंतिम निष्कर्ष से साबित नहीं हुई है।

पांचों Orangutan की सेहत पर निगरानी

Nandankanan Zoological Park में पांचों जानवरों को फिलहाल अलग और नियंत्रित वातावरण में रखा गया है। उनके लिए temperature-controlled quarantine व्यवस्था की गई है और veterinary teams नियमित स्वास्थ्य जांच कर रही हैं।

हालिया स्वास्थ्य जांच में तीन Orangutan में anaemia पाया गया, जिनमें एक में स्थिति गंभीर बताई गई। विशेषज्ञों ने उनके उपचार और पोषण के लिए supportive care शुरू की है। अधिकारियों ने कहा है कि उनकी हालत और स्थिर होने के बाद आगे genetic testing की योजना है।

DNA जांच से सामने आ सकती है असली उत्पत्ति

पांचों जानवर किस Orangutan species से संबंधित हैं और उनका मूल क्षेत्र क्या है, यह पता लगाने में DNA analysis महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। परीक्षण से यह जानने में मदद मिल सकती है कि वे Borneo, Sumatra या किसी अन्य captive population से आए हैं।

इंडोनेशिया की ओर से भी कथित तौर पर genetic testing के परिणामों के आधार पर इन जानवरों की संभावित वापसी में सहायता की पेशकश की गई है। हालांकि फिलहाल Odisha सरकार ने उनके भविष्य और संभावित repatriation पर अंतिम फैसला नहीं किया है।

Orangutan संरक्षण के लिए गंभीर चिंता

Orangutan की सभी मौजूदा प्रजातियां गंभीर संरक्षण संकट का सामना कर रही हैं। जंगलों का नुकसान, habitat fragmentation और अवैध वन्यजीव व्यापार इनके लिए प्रमुख खतरों में शामिल हैं। पांच छोटे Orangutan का एक साथ अज्ञात परिस्थितियों में भारत में मिलना इसलिए भी चिंता बढ़ाता है क्योंकि कम उम्र के जानवर अवैध व्यापार में विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Orangutan के commercial trade पर कड़े नियम लागू हैं। ऐसे में यदि जांच में अवैध तरीके से भारत लाए जाने की पुष्टि होती है, तो मामला अंतरराष्ट्रीय wildlife trafficking के बड़े नेटवर्क से भी जुड़ सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां इसी संभावना की पड़ताल कर रही हैं।

रहस्य अभी बरकरार

सितंबर के मध्य तक कई एजेंसियों की जांच के बावजूद पांचों Orangutan को बालासोर तक पहुंचाने वाले किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई थी। अधिकारियों ने CCTV, वाहन गतिविधियों और संभावित interstate तथा international links की जांच जारी रखी है।

निष्कर्ष: बालासोर में पांच नन्हे Orangutan का मिलना भारत में दुर्लभ विदेशी वन्यजीवों की अवैध आवाजाही पर गंभीर सवाल उठाता है। फिलहाल प्राथमिकता इन जानवरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की है, जबकि STF और WCCB उनके भारत पहुंचने की वास्तविक कहानी तलाश रहे हैं।