नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: भारत के semiconductor क्षेत्र में निर्माण और commercial production का नया चरण शुरू होता दिखाई दे रहा है। नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित SEMICON India 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के बढ़ते semiconductor ecosystem और आने वाले वर्षों की रणनीति पर जोर दिया। 17 से 19 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस आयोजन की थीम “Silicon to Systems: Building the Ecosystem” है। इसमें semiconductor manufacturing के साथ chip design, packaging, research, materials, talent development और वैश्विक supply chain जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री ने semiconductor industry से जुड़े वैश्विक कारोबारियों और निवेशकों से भारत में manufacturing तथा research capabilities को विस्तार देने में भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने देश में विकसित हो रही क्षमताओं को innovation और advanced technology के साथ जोड़ने पर भी जोर दिया। भारत की semiconductor strategy अब केवल परियोजनाओं को मंजूरी देने तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार, कुछ semiconductor units ने उत्पादन शुरू कर दिया है और नए commercial production lines भी शुरू की गई हैं। MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने SEMICON India के दौरान बताया कि भारत में पांच semiconductor units बन चुकी हैं और production में हैं। सरकार की अप्रैल 2026 की जानकारी के अनुसार, दो semiconductor plants में commercial production शुरू हो चुका था और दो अन्य संयंत्रों के इसी वर्ष commercial production में आने की उम्मीद जताई गई थी। भारत सरकार ने जुलाई 2026 में Semicon 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य semiconductor value chain को और व्यापक बनाना है। इस चरण में केवल fabs या assembly facilities पर ही ध्यान नहीं है। Chip design, semiconductor machinery और materials, advanced packaging, research तथा skilled talent को भी कार्यक्रम के प्रमुख हिस्सों में शामिल किया गया है। भारत में semiconductor ecosystem को manufacturing के साथ design और research से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार के अनुसार, 332 से अधिक academic institutes को advanced chip-design tools उपलब्ध कराए गए हैं और 105 startups chip development से जुड़े हैं। Design Linked Incentive scheme के तहत भी 24 startups को मंजूरी दी गई है। इसका लक्ष्य देश में ऐसी क्षमताएं विकसित करना है जिनसे semiconductor value chain के अलग-अलग चरणों में घरेलू कंपनियों और research institutions की भागीदारी बढ़ सके। Semiconductor chips आज smartphones, automobiles, artificial intelligence, telecommunications, defence systems, data centres और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए घरेलू manufacturing क्षमता बढ़ने से भारत को वैश्विक supply chains में अधिक भागीदारी का अवसर मिल सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर semiconductor ecosystem तैयार करने के लिए capital-intensive manufacturing, advanced technology, skilled workforce, reliable infrastructure और वैश्विक कंपनियों के साथ लंबे समय तक सहयोग जरूरी होगा। SEMICON India 2026 में सामने आई तस्वीर यह बताती है कि भारत semiconductor क्षेत्र में policy formation से production और ecosystem expansion की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में नई fabs, packaging facilities, chip-design कंपनियों, suppliers और skilled workforce का विस्तार इस रणनीति की वास्तविक प्रगति को तय करेगा। सरकार का Semicon 2.0 कार्यक्रम इसी व्यापक ecosystem को विकसित करने की दिशा में अगला कदम है।SEMICON India 2026 में नई दिशा
अब सिर्फ योजनाएं नहीं, उत्पादन पर फोकस
Semicon 2.0 से पूरे ecosystem पर जोर
Chip design और research को भी बढ़ावा
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है semiconductor sector?
अगला चरण execution और scale का
भारत की semiconductor यात्रा ने पकड़ी रफ्तार, नीति से commercial production की ओर बढ़ा देश



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