नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए हैं। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने BRICS देशों के बीच व्यापार को और मजबूत करने के लिए एक अलग बीमा व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। इस प्रस्ताव का मकसद यह है कि BRICS देशों के बीच होने वाले कारोबार में जोखिम कम किया जा सके और सदस्य देशों के व्यापारी तथा कंपनियां आपसी व्यापार के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकें। पुतिन ने इसके साथ अनाज के क्षेत्र में भी BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। लेकिन इस सम्मेलन में सिर्फ व्यापार की चर्चा नहीं हुई। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी BRICS एजेंडे के केंद्र में रहा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS देशों के लिए AI के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने एक ऐसे ओपन और समावेशी AI इकोसिस्टम की पहल का प्रस्ताव रखा, जिसमें अलग-अलग देश तकनीक और ज्ञान के विकास में मिलकर काम कर सकें। शी ने पांच क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात रखी। पहला—ओपन और समावेशी AI को बढ़ावा देना। दूसरा—व्यापार और निवेश को आसान बनाना। तीसरा—डिजिटल उद्योगों में सहयोग बढ़ाना। चौथा—स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग यानी तकनीक आधारित उत्पादन को आगे बढ़ाना। और पांचवां—विज्ञान, तकनीक और प्रतिभाओं के विकास में संयुक्त प्रयास। यानी BRICS अब केवल व्यापार और वित्तीय सहयोग की बात नहीं कर रहा, बल्कि AI और नई तकनीकों को भी भविष्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में 11 BRICS सदस्य देशों के नेता शामिल हुए। सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त घोषणा में व्यापार, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन प्रस्तावों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है। क्योंकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्ताव रखना पहला कदम होता है। असली चुनौती होती है—इन योजनाओं को लागू करना, देशों के बीच सहमति बनाना और उन्हें वास्तविक व्यापार तथा तकनीकी सहयोग में बदलना। अगर BRICS देश बीमा, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी और AI जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाते हैं, तो इससे सदस्य देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों का दायरा और बड़ा हो सकता है। नई दिल्ली में हुए इस सम्मेलन ने एक बात साफ कर दी है—BRICS का एजेंडा अब सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और भविष्य की औद्योगिक व्यवस्था भी इसके सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
दिल्ली में BRICS Summit से बड़ी खबर, व्यापार और AI पर नए प्रस्ताव






