नई दिल्ली से आंध्र प्रदेश से जुड़े एक गंभीर मामले में बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने गाडे साईं कृष्ण की कथित पुलिस हिरासत में मौत और उसके बाद उनके लापता होने के मामले में राज्य पुलिस की जांच को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। तीन जजों की पीठ ने मामले में चल रही आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट की संबंधित कार्यवाही पर रोक लगाते हुए जांच की निगरानी सीधे अपने हाथ में लेने का फैसला किया है। कोर्ट ने राज्य से मामले से जुड़े रिकॉर्ड और जांच की जानकारी सीलबंद लिफाफे में 30 सितंबर तक जमा कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे अहम मुद्दों में से एक FIR दर्ज करने में हुई देरी रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, साईं कृष्ण के लापता होने को लेकर उनकी मां की ओर से 28 मई को शिकायत किए जाने की बात सामने आई, जबकि संबंधित FIR 19 जून को दर्ज की गई। इसी देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकीलों से सवाल किया कि शिकायत मिलने के बाद तत्काल FIR क्यों नहीं दर्ज की गई। कोर्ट ने मामले की जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी मांगी है। मामले में एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि साईं कृष्ण को पुलिस की हिरासत में लिए जाने के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश क्यों नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, उन्हें मई में टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने पकड़ा था और बाद में कृष्णलंका पुलिस स्टेशन लाया गया। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि हिरासत में लिए जाने के बाद उनकी स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड क्यों नहीं रहा। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस स्टेशन के CCTV फुटेज से जुड़े मामले पर भी सवाल उठाए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उस महत्वपूर्ण अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं मिली। अदालत ने इस पहलू को भी गंभीरता से देखा और मामले से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से उसके सामने पेश करने का निर्देश दिया है। गाडे साईं कृष्ण को मई 2026 में एक गैर-जमानती वारंट के सिलसिले में टास्क फोर्स द्वारा पकड़े जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद उन्हें विजयवाड़ा के कृष्णलंका पुलिस स्टेशन लाया गया। इसके बाद उनके परिवार ने उनके लापता होने को लेकर शिकायत की। पुलिस जांच के दौरान एक विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया। जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर आरोप सामने आए और मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और जांच के निष्कर्षों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट अब जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी सीधे देख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सामने दायर याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग भी की गई है। अदालत ने इस पहलू पर भी सवाल उठाए हैं कि क्या जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित रही या वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी की भी पर्याप्त जांच हुई। मामले में CBI को भी संबंधित कार्यवाही में एक पक्ष के रूप में शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से 30 सितंबर तक सीलबंद लिफाफे में केस रिकॉर्ड और जांच से जुड़ी जानकारी मांगी है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। अदालत की निगरानी में अब यह देखा जाएगा कि हिरासत में लिए जाने के बाद साईं कृष्ण के साथ क्या घटनाक्रम हुआ, FIR में देरी क्यों हुई, मजिस्ट्रेट के सामने पेशी क्यों नहीं हुई और CCTV रिकॉर्ड से जुड़े सवालों का जवाब क्या है। फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप जांच और न्यायिक निगरानी के लिहाज से अहम घटनाक्रम है। अदालत के सामने पेश होने वाले रिकॉर्ड और आगे की सुनवाई से मामले की जांच की दिशा पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।FIR दर्ज करने में देरी पर सवाल
मजिस्ट्रेट के सामने पेश क्यों नहीं किया गया?
CCTV फुटेज को लेकर भी सवाल
क्या है पूरा मामला?
वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अब आगे क्या होगा?
आंध्र प्रदेश हिरासत मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस से पूछा—FIR दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई?






