पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत ने सीएसआईआर-एनएमएल, जमशेदपुर में एकेडमिक शोधार्थियों को किया प्रेरित
जमशेदपुर, 2 सितंबर 2026: एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च ( एसीएसआईआर)-एनएमएल साइंस क्लब के तत्वावधान में सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल), जमशेदपुर के सहयोग से आज शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक करियर को दिशा देने तथा भावी शोधकर्ताओं के निर्माण में शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण और स्थायी भूमिका को सम्मानित करना था।
कार्यक्रम में सीएसआईआर-एनएमएल के पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनका स्वागत करते हुए डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक, सीएसआईआर-एनएमएल ने एक सशक्त शोध संस्कृति के निर्माण में मार्गदर्शन एवं मेंटरशिप के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. वी. राजिनीकांत, समन्वयक, एसीएसआईआर-एनएमएल ने भी प्रयोगशाला में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को आगे बढ़ाने में AcSIR की भूमिका और महत्व को रेखांकित किया।
अपने संबोधन में डॉ. श्रीकांत ने सीएसआईआर-एनएमएल में एसीएसआईआर के प्रारंभिक वर्षों और इसके क्रमिक विकास को याद करते हुए कहा कि कार्यक्रम की स्थापना के दौरान अनेक चुनौतियाँ सामने आई थीं। वैज्ञानिकों, शिक्षकों तथा उद्योग जगत के सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों ने एसीएसआईआर-एनएमएल के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि AcSIR-NML से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक शोधार्थी आगे चलकर प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक पदों पर पहुंचे हैं। उन्होंने प्रयोगशाला से इस कार्यक्रम की निरंतर समीक्षा करने तथा समय की आवश्यकताओं के अनुरूप इसमें निरंतर सुधार एवं नवाचार करने का आग्रह किया, ताकि सीएसआईआर-एनएमएल सामग्री अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए एक पसंदीदा संस्थान बना रहे।
अपने संबोधन में डॉ. श्रीकांत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में शिक्षण एवं अधिगम के बदलते स्वरूप को भी प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि AI शिक्षा के पारंपरिक तरीकों में व्यापक बदलाव ला रहा है, लेकिन ऐसा प्रेरणादायी शिक्षक, जो स्पष्टता, नवाचार और विद्यार्थियों में जिज्ञासा जगाने की क्षमता रखता हो, हमेशा अपरिहार्य रहेगा।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने अपने तीन उत्कृष्ट शिक्षकों—प्रो. राजेश प्रसाद, प्रो. पी. रामचंद्र राव और प्रो. टी. आर. अनंतरामन—को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने बताया कि शिक्षण, नवाचार और मार्गदर्शन के उनके विशिष्ट तरीकों ने उन पर गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ा। डॉ. श्रीकांत ने युवा शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा:
“एक महान शिक्षक वही है जो महान विद्यार्थियों का निर्माण करता है।”
कार्यक्रम के अंत में निदेशक, सीएसआईआर-एनएमएल द्वारा डॉ. एस. श्रीकांत को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर ने शोधार्थियों एवं वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन, जिज्ञासा, नवाचार तथा अपने शिक्षकों की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी के महत्व पर विचार करने के लिए एक सार्थक मंच प्रदान किया।
समारोह की एक विशेष विशेषता के रूप में अपराह्न में एसीएसआईआर शोधार्थियों के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सीएसआईआर-एनएमएल के दो पूर्व निदेशक—डॉ. एस. श्रीकांत और डॉ. आई. चट्टोराज—ने भाग लिया। इस सत्र में शोधार्थियों को संस्थान के पूर्व नेतृत्वकर्ताओं के साथ सीधे संवाद करने, अपने प्रश्न रखने तथा वैज्ञानिक अनुसंधान, नेतृत्व और करियर विकास से जुड़े उनके समृद्ध अनुभव एवं दृष्टिकोण से लाभ उठाने का अवसर मिला।

