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रोजमर्रा की आदतें जो गुर्दों पर चुपचाप करती हैं हमला


आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाकर किडनी डिजीज का खतरा बढ़ा देती हैं। किडनी शरीर से टॉक्सिन निकालने, ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने, इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस रखने और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में अहम भूमिका निभाती है, लेकिन कुछ आदतें इन अंगों पर बेवजह दबाव डालकर किडनी डिजीज, किडनी स्टोन और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बनती हैं।


जिम जाने वाले लोग प्रोटीन सप्लीमेंट्स भी ज्यादा लेते हैं, जिससे शरीर में यूरिया बढ़ता है, किडनी को फिल्‍टर करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और पहले से कमजोर किडनी जल्‍दी खराब होती है।

प्रोसेस्ड फूड और हाई-प्रोटीन डाइट

आजकल लोग मैगी, चिप्स, रेडी-टू-मेक सूप, प्रोसेस्ड मीट, बेकरी प्रोडक्ट्स बहुत ज्‍यादा खाते हैं। इनमें नमक, प्रिजर्वेटिव और फॉस्फेट बहुत ज्यादा होते हैं, जो किडनी पर बोझ बढ़ाते हैं।


नमक, अचार, पापड़ और नमकीन ज्यादा खाना

भारतीय भोजन में नमक बहुत ज्‍यादा होता है। अचार, पापड़, चटनी और पैकेज्ड स्नैक्स और बाहर का खाना इसके लिए सबसे बड़े दोषी माने जाते हैं। ज्‍यादा नमक से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, किडनी पानी सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाती और शरीर में सूजन और 'प्रोटीन लीकेज' होने लगता है, जो किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत है।


सिरदर्द, बुखार, शरीर में दर्द, पीरियड पेन आदि होने पर लोग बिना सोचे NSAIDs जैसे पेनकिलर ले लेते हैं। इन पेनकिलर्स को लंबे समय तक लेने से किडनी की नसों में ब्‍लड का फ्लो कम हो जाता है, किडनी के ऊतकों को नुकसान पहुंचता है और यह 'Analgesic Nephropathy' जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।


डायबिटीज, बीपी या पहले से किडनी में गड़बड़ी से परेशान मरीजों में खतरा दोगुना बढ़ जाता है। किसी भी दर्द में बार-बार दवा लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।


कम पानी पीना और चाय-कॉफी ज्‍यादा लेना

 ज्यादातर लोग दिनभर में जरूरी 2-2.5 लीटर पानी नहीं पीते, जबकि चाय, कॉफी और शुगरी ड्रिंक ज्यादा लेते हैं। कम पानी पीने से यूरिन कम बनता है और शरीर में टॉक्सिन, यूरिक एसिड, कैल्शियम और ऑक्‍सलेट जमा होने लगते हैं। इससे किडनी स्‍टोन बनने का खतरा बढ़ता है।


किडनी को बचाना मुश्किल नहीं है, बस कुछ आदतें सुधारने की जरूरत है।

  • पर्याप्त पानी पिएं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर न खाएं।
  • खाने में नमक कम करें।
  • डायबिटीज और बीपी कंट्रोल में रखें।
  • प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।