AI...तकनीक का वरदान, या विनाश का हथियार..?
• क्यों वैज्ञानिकों को सता रहा है मानवता के अंत का डर
अमित कुमार,
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : बेशक आज का दौर तकनीक का है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात सोने तक हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से घिरे हैं। मोबाइल का फेस अनलॉक, गूगल मैप, यूट्यूब के सुझाव, चैटजीपीटी जैसे टूल्स, सब AI की ही देन हैं। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम उसके गुलाम हो जाएं। तकनीक का इस्तेमाल कितना और कैसे करना है, ये तय करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
इसी बीच दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनी एंथ्रोपिक से एक रिसर्चर के इस्तीफे ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है।
27 वर्षीय रिसर्चर जैकब कॉक्सन, जिन्होंने पिछले तीन साल ओपनएआई और एंथ्रोपिक में प्री-ट्रेनिंग मॉडल्स पर काम किया है, ने X पर इस्तीफा देते हुए लिखा - "न तो कंपनी जिम्मेदारी से काम कर रही है। वे सीधे सेल्फ-इम्प्रूविंग सुपरइंटेलिजेंस की तरफ दौड़ रहे हैं और हमारी जिंदगियों के साथ जुआ खेल रहे हैं।"
कॉक्सन ने चेतावनी दी है - "AI बनाने वाले लोग दिल से मानते हैं कि यह दशक के अंत तक हम सभी को मार सकता है। यह कोई मार्केटिंग स्टंट नहीं है।" उन्होंने कहा, "एआई की रफ्तार को नहीं रोका गया तो हम सभी खत्म हो जाएंगे।" उनकी इस बात का समर्थन एंथ्रोपिक के ही सेफ्टी लीड इवान हुबिंगर ने भी किया और कहा कि अगले दशक में AI के मानवता को खत्म करने का खतरा 10% से ज्यादा है।
*AI क्यों है वरदान...*
1. *स्वास्थ्य और शिक्षा में क्रांति:* AI की मदद से कैंसर जैसी बीमारियों का पता महीनों पहले चल रहा है। फूलो झानो मेडिकल कॉलेज जैसे अस्पतालों में भी क्यू मैनेजमेंट और डायग्नोसिस में AI का इस्तेमाल हो रहा है।
2. *काम में तेजी:* खेती में मौसम का अनुमान, फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन, बैंकिंग में फ्रॉड डिटेक्शन - हर जगह AI ने इंसान की क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।
3. *भाषा और ज्ञान:* आज एक किसान भी अपनी भाषा में AI से सरकारी योजना की जानकारी ले सकता है।
*AI के नुकसान - गुलामी की तरफ बढ़ते कदम...*
1. *नौकरियों पर खतरा:* डेटा एंट्री, कस्टमर सपोर्ट, कंटेंट राइटिंग जैसी लाखों नौकरियां खतरे में हैं।
2. *डीपफेक और गलत सूचना:* AI से बना फर्जी वीडियो और फोटो समाज में अफवाह और दंगे तक फैला सकते हैं।
3. *नियंत्रण से बाहर होने का डर:* एक्सपर्ट्स का सबसे बड़ा डर सेल्फ-इम्प्रूविंग AI को लेकर है। ऐसी प्रणाली जो खुद को इंसान के बिना बेहतर बनाती रहे। कॉक्सन ने चेतावनी दी - "ये जल्द ही सुपरह्यूमन सिस्टम होंगे जो कुछ भी हैक कर सकते हैं, रातों-रात किसी भी क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं।"
4. *मानसिक गुलामी:* हम सोचने से पहले गूगल या चैटजीपीटी से पूछने लगे हैं। याददाश्त, विश्लेषण और रचनात्मकता कमजोर हो रही है।
तकनीक बुरी नहीं है, लेकिन बिना नियम-कानून और बिना सोचे-समझे उसकी दौड़ मानवता के लिए आत्मघाती हो सकती है। कॉक्सन ने भी कहा कि बिना बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय नियमों के कोई भी कंपनी जिम्मेदारी से AI नहीं बना सकती।
जरूरत है कि हम AI को मालिक नहीं, बल्कि औजार बनाकर रखें।







