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मानव वन्य- प्राणी संघर्ष की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दें । श्री संजीव कुमार,प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ),झारखंड।


आज प्रधान मुख्य वन संरक्षक झारखंड,श्री संजीव कुमार की अध्यक्षता में वन मुख्यालय रांची स्थित  कॉन्फ्रेंस हॉल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वन्य प्राणी और मानव संघर्ष की रोकथाम के लिए एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक,वन्य प्राणी, झारखंड श्री रवि रंजन एवं मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी झारखंड श्री एस आर नटेश,वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रशासन,श्री बनकर अजिंक्य सहित पूरे झारखंड के सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी,सभी वन संरक्षक,सभी आरसीसीएफ उपस्थित थे। प्रधान मुख्य वन संरक्षक झारखंड ने अपने संबोधन में कहा कि हाल के दिनों में झारखंड राज्य के कुछ जिलों में हाथी द्वारा जानलेवा करवाई की गई है इस मानव वन्य -प्राणी संघर्ष के रोकथाम के लिए तकनीकी सेवाओं को कारगर बनाएं,आधारभूत संरचना को मजबूत करें, श्री संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक झारखंड  ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने बैठक में निर्देश दिया है हाथी एवं जंगली जानवरों द्वारा हमले, दुर्घटना, मृत्यु की स्थिति में किसी भी हाल में 12 दिनों के अंदर मुआवजे का भुगतान किया जाए। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजीव कुमार ने कहा कि हमारा प्रयास हो की 10 दिनों के अंदर मुआवजे का भुगतान कर दिया जाए। वन्य जीव हमले की रोकथाम में स्थानीय ग्रामीण की सहभागिता बढ़ाई जाए जिससे इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। ग्रामीणों को जागरूक करें उन्हें उपाय बताएं उन्हें उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराए। श्री संजीव कुमार ने राज्य के उच्च वन अधिकारियों को निर्देश दिया कि हाथी द्वारा प्रोन एरिया को जोन में बांटे और उस पर त्वरित कार्रवाई करें 30 मिनट के अंदर क्विक रिस्पांस टीम घटनास्थल पर पहुंचे।
       प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी श्री रवि रंजन ने वन प्रमंडल पदाधिकारीयों को कहा कि सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी आपस में मिलकर काम करें ना कि अपने वन प्रमंडल की रक्षा करें और अपने वन प्रमंडल से हाथी को भगाने का काम ना करें । हाथी को शांत करने का प्रयास करें। त्वरित कार्यबल हाथी के साथ-साथ चलें और यदि हाथी दूसरे वन प्रमंडल में प्रवेश करता है तो दूसरे वन प्रमंडल की टीम साथ मिलकर कार्य करें। कोई आवश्यकता हो तो राज्य मुख्यालय से तुरंत संपर्क कर सहायता प्राप्त करें। 
         मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी श्री एस आर नटेश ने कहां की साइलोज के निर्माण और विकास पर जोर दिया जाए जिसमें अनाज जमीन के अंदर रखें ताकि हाथी अनाज के सुगंध को पहचान ना पाए ।चेक डैम के निर्माण घास का मैदान पूरे राज्य में विकसित करने का प्रयास किया जाए मुख्य वन संरक्षक श्री नटेश ने कहा कि कॉरिडोर को बचाना है माइक्रो हैबिटेट का निर्माण करना है ।प्रधान मुख्य वन संरक्षक झारखंड सर ने जो फॉक्स ग्रुप बनाया है उसमें माइक्रो हैबिटेट विकसित करने का प्रयास करें तथा जहां पानी हो, घास हो और हाथी को मानसिक तनाव न हो ऐसा जगह विकसित करें। 
          प्रधान मुख्य वन संरक्षक  झारखंड श्री संजीव कुमार ने कहा कि राज्य में लगभग 680 के आसपास हाथी है उनकी सुरक्षा तथा मानव की सुरक्षा दोनों की जिम्मेवारी हमारे विभाग की है ,रीजन स्तर पर वन प्रमंडल स्तर पर मिलकर काम करें कॉरिडोर मैपिंग हो चुकी है आधारभूत संरचना विकसित करें और उपकरणों को खरीद करें, ड्रोन, रेडियो कॉलर  आदि एक दूसरे जिला को मदद करें । पांच दिन बाद पुन इस विषय पर दिए गए निर्देश की समीक्षा करने की बात प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री संजीव कुमार ने कही।