BREAKING NEWS

logo

Advertisement
Advertisement

UN में AI के वैश्विक नियंत्रण की मांग, ऑल्टमैन और अमोदेई ने अंतरराष्ट्रीय नियमों पर दिया जोर


न्यूयॉर्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की तेजी से बढ़ती क्षमता को लेकर संयुक्त राष्ट्र में गंभीर चर्चा हुई। 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विशेष बैठक में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन और Anthropic के CEO डारियो अमोदेई ने AI के संभावित सुरक्षा जोखिमों पर अपनी चिंताएं सामने रखीं। दोनों तकनीकी नेताओं ने कहा कि AI का विकास केवल कंपनियों या किसी एक देश के स्तर पर नियंत्रित करने का विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुरक्षा मानकों की जरूरत है।

AI को लेकर बढ़ रही वैश्विक चिंता

बैठक ऐसे समय हुई है जब AI मॉडल लगातार अधिक सक्षम होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों और सरकारों के बीच यह बहस तेज है कि अत्यधिक शक्तिशाली AI सिस्टम को किस तरह सुरक्षित रखा जाए और ऐसी स्थिति से कैसे बचा जाए जिसमें इंसानों की निगरानी या हस्तक्षेप मुश्किल हो जाए।

Anthropic के प्रमुख डारियो अमोदेई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि यदि AI का प्रबंधन सही तरीके से नहीं किया गया तो यह पूरी मानवता के लिए जोखिम बन सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी एक नेता, कंपनी या देश के लिए अकेले इस चुनौती से निपटना संभव नहीं है।

ऑल्टमैन ने मानव नियंत्रण को बताया अहम

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने AI के सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ उसके संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने कहा कि AI को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि महत्वपूर्ण फैसलों पर मानव नियंत्रण बना रहे।

ऑल्टमैन के मुताबिक, AI से जुड़े बड़े फैसले केवल कुछ तकनीकी कंपनियों या सिलिकॉन वैली की प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से AI के भविष्य से जुड़े नियम तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वैश्विक मानकों और घटना रिपोर्टिंग की जरूरत

ऑल्टमैन ने अंतरराष्ट्रीय AI सुरक्षा मानकों के निर्माण के साथ-साथ AI से जुड़ी गंभीर घटनाओं की तेज और सटीक रिपोर्टिंग की व्यवस्था की वकालत की। उनका तर्क है कि यदि किसी AI सिस्टम से गंभीर सुरक्षा घटना होती है, तो अलग-अलग देशों और संस्थानों के बीच इसकी जानकारी साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

OpenAI ने बैठक से पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी मानकों, समान मापदंडों और AI से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया था।

AI के फायदे भी चर्चा का हिस्सा

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में केवल खतरे ही नहीं, बल्कि AI से मिलने वाले संभावित लाभों पर भी चर्चा हुई। AI स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा, उत्पादकता और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से इस्तेमाल हो रहा है।

ऑल्टमैन ने AI को मानव क्षमता बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में देखने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी है। उनके अनुसार अत्यधिक आशावाद और अत्यधिक भय—दोनों से बचते हुए व्यावहारिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी होगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी AI शासन पर जोर दे चुके हैं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी AI को वैश्विक स्तर की चुनौती बताया है। 22 सितंबर को उन्होंने AI के लिए बहुपक्षीय जोखिम प्रबंधन ढांचे और स्वतंत्र निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जीवन-मृत्यु से जुड़े फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जाने चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की एक सितंबर रिपोर्ट में भी AI एजेंटों के ऐसे व्यवहार पर चर्चा की गई है जिसमें सिस्टम मानवीय निर्देशों से अलग तरीके अपना सकते हैं। रिपोर्ट ने यह भी कहा कि AI से जुड़ी घटनाएं कंपनियों और देशों की सीमाओं से आगे जा सकती हैं, इसलिए केवल किसी एक संगठन के अनुभव के आधार पर पूरे जोखिम को समझना मुश्किल है।

अमेरिका और चीन के रुख में अंतर

संयुक्त राष्ट्र की बैठक में AI के वैश्विक नियमन को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आए। Reuters के अनुसार अमेरिकी पक्ष ने किसी नई वैश्विक नियामक व्यवस्था को लेकर सावधानी जताई और घरेलू क्षमता तथा देशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर जोर दिया।

दूसरी ओर, चीन के संयुक्त राष्ट्र राजदूत फू कॉन्ग ने AI के लिए नियामक ढांचे में लगातार सुधार, आपात प्रतिक्रिया और सीमा-पार सहयोग की आवश्यकता बताई। इससे स्पष्ट है कि AI शासन को लेकर प्रमुख शक्तियों के बीच अभी एक समान दृष्टिकोण नहीं बना है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बहस?

AI अब केवल चैटबॉट या कंटेंट बनाने वाली तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है। AI एजेंट साइबर सुरक्षा, शोध, सॉफ्टवेयर विकास और कई जटिल कार्यों में इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा, जवाबदेही, डेटा, साइबर हमलों और मानव नियंत्रण से जुड़े सवाल भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में हुई चर्चा का एक प्रमुख संदेश यही रहा कि AI का विकास वैश्विक स्तर पर हो रहा है, इसलिए इसके संभावित जोखिमों और सुरक्षा घटनाओं से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग की व्यवस्था पर भी चर्चा जरूरी है। हालांकि, वैश्विक नियमों का अंतिम स्वरूप और उन्हें लागू करने का तरीका अभी तय नहीं हुआ है।

आगे की राह

AI के क्षेत्र में आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और नियमन दोनों साथ-साथ आगे बढ़ने की संभावना है। चुनौती यह होगी कि सुरक्षा मानक इतने प्रभावी हों कि गंभीर जोखिमों को कम किया जा सके, लेकिन वैज्ञानिक शोध और उपयोगी तकनीकी विकास पर अनावश्यक बाधाएं भी न आएं।

संयुक्त राष्ट्र की हालिया चर्चा ने इस बहस को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर तक पहुंचा दिया है। अब सवाल केवल यह नहीं है कि AI कितना शक्तिशाली हो सकता है, बल्कि यह भी है कि उसकी शक्ति पर निगरानी, जवाबदेही और मानव नियंत्रण किस तरह सुनिश्चित किया जाए।

कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध रिपोर्टों के तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र शब्दों, नए वाक्य-विन्यास और मौलिक प्रस्तुति में तैयार किया गया है। इसे किसी स्रोत की लाइन-दर-लाइन कॉपी के रूप में नहीं लिखा गया है। हालांकि, समाचार से जुड़े फोटो, वीडियो, ग्राफिक्स और अन्य मीडिया सामग्री के अधिकार अलग हो सकते हैं।