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ट्रंप के नक्शे के बाद फ्रांस और कनाडा का बड़ा कदम


फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अगले सप्ताह Saint-Pierre-et-Miquelon पहुंचने वाले हैं।

यह उत्तरी अटलांटिक में स्थित फ्रांस का एक छोटा द्वीप समूह है, जो कनाडा के न्यूफाउंडलैंड के तट से लगभग 20 किलोमीटर दूर है और यहां करीब 6 हजार लोग रहते हैं।

इस दौरे का समय इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर उत्तरी अमेरिका का एक नक्शा पोस्ट किया था, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड, मैक्सिको और कुछ अन्य क्षेत्रों के साथ फ्रांस के कई विदेशी क्षेत्रों को भी अमेरिकी झंडे के रंग में दिखाया गया था।

इसके बाद फ्रांस और कनाडा की ओर से Saint-Pierre-et-Miquelon की संयुक्त यात्रा की घोषणा हुई।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, इस यात्रा के जरिए दोनों देश राष्ट्रीय संप्रभुता, लोकतंत्र, कानून के शासन और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करना चाहते हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों 19 से 21 सितंबर तक इस क्षेत्र में रहेंगे, जबकि कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 20 सितंबर को उनके साथ वहां पहुंचेंगे।

इस यात्रा की एक और ऐतिहासिक खासियत है।

यह Saint-Pierre-et-Miquelon की कनाडा के किसी प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।

मैक्रों के कार्यक्रम में स्थानीय लोगों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और क्षेत्र से जुड़े लोगों से मुलाकात भी शामिल है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते स्तर जैसी स्थानीय चुनौतियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

अब सवाल है कि इस छोटे से द्वीप समूह को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?

इसकी वजह सिर्फ इसका भौगोलिक स्थान नहीं है। यह इलाका कनाडा के बेहद करीब स्थित फ्रांस का उत्तरी अमेरिकी क्षेत्र है। इसलिए यहां फ्रांस और कनाडा के शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, इस यात्रा को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर फ्रांस ने इसे दोनों देशों के साझा मूल्यों और राष्ट्रीय संप्रभुता को रेखांकित करने वाली यात्रा के रूप में पेश किया है।

यानी एक तरफ अमेरिका की ओर से विवादित नक्शे की चर्चा है, तो दूसरी तरफ फ्रांस और कनाडा अपने-अपने क्षेत्रीय अधिकार और संप्रभुता को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

अब दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि मैक्रों और कार्नी की इस संयुक्त यात्रा के दौरान क्या संदेश सामने आता है और इसका अमेरिका के साथ दोनों देशों के संबंधों पर क्या कूटनीतिक असर पड़ता है।

फिलहाल इतना साफ है कि Saint-Pierre-et-Miquelon का यह छोटा-सा द्वीप समूह आने वाले दिनों में बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है।

आप इस पूरे घटनाक्रम को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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