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UN में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का कड़ा संदेश, बोले—दबाव के आगे नहीं झुकेंगे, बातचीत का रास्ता खुला


न्यूयॉर्क। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गंभीर तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने देश का रुख स्पष्ट किया। 23 सितंबर को दिए संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा, लेकिन साथ ही यह भी संकेत दिया कि तेहरान कूटनीति और बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता।

दबाव के आगे झुकने से इनकार

पेजेशकियन ने अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए कड़े बयानों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि धमकी और दबाव से ईरान अपनी स्थिति नहीं बदलेगा।

ईरानी राष्ट्रपति ने यह संदेश भी दिया कि उनका देश युद्ध से बचने और विवादों का कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए बातचीत को तैयार है, लेकिन किसी भी वार्ता में बल प्रयोग या दबाव की भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी।

बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत

पेजेशकियन के भाषण का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने अमेरिका के साथ संवाद की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान संवाद, कूटनीति और बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते वार्ता समान आधार पर हो और उस पर सैन्य या राजनीतिक दबाव न डाला जाए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क हुआ है। हालांकि दोनों पक्षों की सार्वजनिक स्थिति में अभी भी काफी अंतर बना हुआ है।

अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में क्या हुआ?

रिपोर्टों के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी पक्ष के प्रतिनिधियों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत हुई। यह कई महीनों बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क का महत्वपूर्ण प्रयास था।

ईरानी पक्ष ने बातचीत के दौरान युद्ध समाप्त करने, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने और ईरान पर लगे आर्थिक तथा समुद्री दबाव को कम करने जैसी शर्तों को सामने रखा। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच किसी व्यापक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना बड़ा मुद्दा

अमेरिका-ईरान तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल परिवहन के लिए अहम है और यहां किसी भी लंबे व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

ईरानी अधिकारियों ने पहले कहा था कि यदि अमेरिकी सैन्य दबाव और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जैसी परिस्थितियां कम होती हैं, तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर विचार कर सकता है।

परमाणु कार्यक्रम पर भी ईरान का रुख

पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान को नागरिक परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकार है और उनका देश परमाणु हथियार बनाने का लक्ष्य नहीं रखता।

यह मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से विवाद का प्रमुख कारण रहा है। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है, जबकि अमेरिका इस कार्यक्रम और उससे जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता रहा है।

UN में अमेरिका और ईरान के संदेश अलग-अलग

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के संदेशों में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। ट्रंप ने एक दिन पहले अपने भाषण में ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया था और समझौता नहीं होने की स्थिति में गंभीर परिणामों की चेतावनी दी थी।

इसके जवाब में पेजेशकियन ने ईरान के आत्मसमर्पण से इनकार करते हुए बातचीत की संभावना बनाए रखने की बात कही। इस तरह UNGA का मंच अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा कूटनीतिक टकराव का प्रमुख केंद्र बन गया।

दोनों देशों के बीच दूरी अभी भी कायम

हालांकि बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया कि अमेरिका और ईरान अभी भी युद्ध समाप्त करने के तौर-तरीकों पर काफी दूर हैं, हालांकि कूटनीतिक प्रयास जारी रहना चाहिए।

इससे संकेत मिलता है कि बातचीत की शुरुआत अपने आप में किसी समझौते का संकेत नहीं है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की शर्तों और मध्यस्थ देशों की भूमिका पर नजर रहेगी।

वैश्विक स्तर पर क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। संघर्ष और समुद्री मार्गों में व्यवधान से तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी नए घटनाक्रम पर एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के देश नजर बनाए हुए हैं।

निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र महासभा में मसूद पेजेशकियन ने एक साथ दो संदेश दिए—ईरान अमेरिकी दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है, लेकिन कूटनीति और बातचीत का रास्ता भी बंद नहीं किया गया है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच हालिया अप्रत्यक्ष संपर्क के बावजूद दोनों पक्षों की शर्तों में अभी पर्याप्त अंतर बना हुआ है। आगे की कूटनीतिक कोशिशें यह तय करेंगी कि यह संपर्क किसी व्यापक समझौते की दिशा में बढ़ता है या नहीं।

कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के तथ्यों के आधार पर नए शब्दों और स्वतंत्र वाक्य-विन्यास में तैयार किया गया है। किसी स्रोत की खबर को शब्दशः कॉपी नहीं किया गया है। मूल फोटो, वीडियो, लोगो और ग्राफिक्स के अधिकार अलग हो सकते हैं।