सीवान, 18 अगस्त । जिले के दरौली थाना क्षेत्र के डुमरहर गांव में सोमवार की शाम सरयू नदी के किनारे इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया।
नदी के पानी में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही एक नवजात बच्ची को देखकर मानो समय भी ठहर गया। बच्ची को उसकी मां ने मरने के लिए नदी किनारे छोड़ दिया था, लेकिन शायद ऊपर वाले को उसकी जिंदगी मंजूर थी।
डुमरहर निवासी संजय कुमार की पत्नी सोमवार की शाम टहलते हुए सरयू नदी के तट पर पहुंचीं। वहां उनकी नजर पानी में छटपटा रही एक नवजात बच्ची पर पड़ी। बच्ची के चारों तरफ पानी के कीड़े मंडरा रहे थे और उसके शरीर को नोंच रहे थे। यह दृश्य देखकर महिला का कलेजा कांप उठा।
उन्होंने बिना देर किए पानी में उतरकर बच्ची को बाहर निकाला। बच्ची को पानी से बाहर निकालने के बाद महिला ने इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी।
ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन बच्ची को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्रामीणों और महिला ने ही निभाई।
महिला बच्ची को लेकर पहले दरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सीवान सदर अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया।
सदर अस्पताल में बच्ची का इलाज कर रहे डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि पानी में मौजूद कीड़ों ने बच्ची के शरीर के कई हिस्सों को काटकर जख्मी कर दिया है। हालांकि, फिलहाल बच्ची खतरे से बाहर है और चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।
बच्ची को अस्पताल लेकर पहुंची महिला ने बताया कि जब उन्होंने उसे नदी के पानी से बाहर निकाला, तब भी उसकी नाल लगी हुई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ही मरने के लिए नदी के किनारे छोड़ दिया गया था।
सरयू के किनारे मौत के लिए छोड़ी गई वह नन्ही जान आज अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। जिस मां ने उसे जन्म देकर मौत के हवाले कर दिया, उसी समाज में एक अनजान महिला ने उसे अपनी गोद में उठाकर जीवन देने की कोशिश की।
नदी के पानी में छटपटाती उस बच्ची को समय रहते बाहर नहीं निकाला जाता तो शायद उसकी कहानी वहीं खत्म हो जाती। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में नवजात की सांसें चल रही हैं और उसकी जिंदगी बचाने की उम्मीद भी जिंदा है।
मौत के मुंह से जिंदगी को खींच लाई मां की ममता, सरयू किनारे मिली नवजात






