42 साल से अटूट आस्था, कृष्णा बम 1982 से हर सोमवारी को डाक बम बनकर करती हैं बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक
शंभूनाथ सहाय
बैद्यनाथधाम : सावन के महीने में बाबानगरी आने वाले लाखों कांवरियों में पड़ोसी राज्य बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली "कृष्णा बम" का नाम श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बन गया है। 1982 से लगातार वे पवित्र श्रावण मास के प्रत्येक सोमवारी को "डाक बम" के रूप में सुल्तानगंज से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ को जलार्पण करती आ रही हैं।
कृष्णा बम की यह कठिन साधना 42 वर्षों से बिना किसी रुकावट के जारी है। श्रावण की प्रत्येक सोमवारी को वे सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 109 किलोमीटर की कठिन यात्रा पैदल तय कर देवघर पहुंचती हैं और बाबा को गंगाजल चढ़ाती हैं।
बाबा बैद्यनाथ की महिमा का गुणगान करते हुए "कृष्णा बम" कहती हैं, "दोनों पैर के घुटने घिस जाने के बावजूद बाबा की कृपा से ही पिछले 42 वर्षों से सावन माह के प्रत्येक सोमवारी को डाक बम के रूप में आकर बाबा को जलार्पण कर पाती हूं।"
उम्र के इस पड़ाव में भी उनकी भक्ति और संकल्प में कोई कमी नहीं आई है। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस बार भी प्रशासन की ओर से महिला सुरक्षा कर्मियों को उनके साथ लगाया गया है, जो यात्रा के दौरान उन्हें सहारा देती हैं।
कृष्णा बम की यह निष्ठा न केवल देवघर बल्कि पूरे देश के शिवभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी साधना को देखकर लोग "बोल बम" के जयकारे के साथ उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।
श्रावणी मेले में कृष्णा बम को देखना अब श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष अनुभव बन गया है। उनकी यह आस्था इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भक्ति में उम्र, थकान और बाधाएं मायने नहीं रखतीं।






