देवघर : श्रावणी मेले के पहली सोमवारी पर बाबा नगरी में उमड़ा जनसैलाब
श्रावणी मेले के पहली सोमवारी पर बाबा नगरी में उमड़ा जनसैलाब
• 3.17 लाख श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण.
• जिला प्रशासन की मुस्तैदी से संपन्न हुई व्यवस्था.
देवघर ब्यूरो चीफ़
देवघर : राजकीय श्रावणी मेला-2026 के पांचवें दिन और सावन की पहली सोमवारी पर बाबा नगरी देवघर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
अहले सुबह 04:15 बजे गर्भगृह का पट खुलते ही जलार्पण शुरू हुआ जो देर रात तक जारी रहा।
मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार सोमवार, 03 जुलाई को कुल 3,17,494 श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया। इसमें बाह्य अर्घा से 2,05,236 और आंतरिक अर्घा से 1,12,258 श्रद्धालु शामिल हैं।
"बोल बम" और "हर हर महादेव" के जयकारों से पूरा मेला क्षेत्र गूंजता रहा।
इतनी भारी भीड़ के बावजूद आयोजन को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में देवघर जिला प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही।
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवानियां एवं एसपी प्रवीण पुष्कर के निर्देश पर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारी की थी :-
- कतार प्रबंधन: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू कॉम्प्लेक्स और होल्डिंग पॉइंट्स को पूरी तरह दुरुस्त रखा गया। बैरिकेडिंग और स्वयंसेवकों की मदद से कतार को नियंत्रित किया गया।
- सुरक्षा व्यवस्था: मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, महिला पुलिस और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी रखी गई।
- नागरिक सुविधाएं: कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शेड, मिस्ट कूलिंग, चिकित्सा शिविर और सूचना केंद्र की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य कैंपों में 24 घंटे एम्बुलेंस और दवाइयां उपलब्ध रहीं।
- स्वच्छता और यातायात: नगर निगम द्वारा लगातार सफाई कराई गई। यातायात को सुगम रखने के लिए वन-वे और डायवर्जन लागू किया गया ताकि स्थानीय लोगों को असुविधा न हो।
अहले सुबह से ही कांवरियों की कतारें मंदिर की ओर बढ़ती रहीं। भगवा वस्त्रों में आए श्रद्धालुओं ने अनुशासन के साथ "बोल बम" व "हर-हर महादेव" के नाम का जयघोष के साथ जलार्पण किया। प्रशासनिक अधिकारियों के सकारात्मक रवैये और "सेवा भाव" से ड्यूटी करने के निर्देश के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
श्रद्धालुओं ने देवघर जिला प्रशासन की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि "प्रशासन की बेहतर व्यवस्था के कारण हम बिना किसी दिक्कत के बाबा पर जलार्पण कर पाए।




