विद्यालय में 350 से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। विभागीय लापरवाही की सजा अब उन बच्चों को भुगतनी पड़ रही है। उनका शैक्षणिक सत्र और भविष्य अब अधर में है।
देवघर: प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ा चंदना स्कूल, 70 साल पुराना विद्यालय कोर्ट आदेश से सील, 350 बच्चे सड़क पर.
■ 2007 में एकतरफा हारा केस, विभागीय निष्क्रियता से भू-विवाद बना अभिशाप.
अमित कुमार
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : सरकारी तंत्र की *लगातार निष्क्रियता* का नतीजा है कि देवघर जिले के *सोनारायठाढ़ी* प्रखंड का ऐतिहासिक *राजकीयकृत मध्य विद्यालय, चंदना* रविवार, 05 जुलाई को 'सील' कर दिया गया।
70 साल पुराना यह स्कूल अब बंद है, और *350 से अधिक बच्चे* पढ़ाई से वंचित हैं।
पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:
1. स्थापना से लेकर भवन तक का सफर: 1953-2004
- *1953* में स्कूल की शुरुआत *अपर प्राथमिक स्कूल* के रूप में हुई।
- *1963* में इसे *मिडिल स्कूल* की मान्यता मिली। तब स्कूल *खपरैल भवन* में चलता था।
- *1975-80* में हुए *सेवा सर्वे* में रैयत की *प्लॉट नं. 08, रकवा 2.77 एकड़* जमीन का बंटवारा हुआ। इसमें से *12 डिसमिल जमीन स्कूल*, *70 डिसमिल अस्पताल* के नाम और शेष जमीन अन्य रैयत के नाम *कूर्फा* के आधार पर हाजिर पर्चा में दर्ज है। नक्सा भी कट चुका है।
- इसी कूर्फा जमीन को लेकर दूसरे रैयत ने *संथाल परगना, आयुक्त के न्यायालय में RMA NO.84A/2001-2002, गफूर चौधरी बनाम झारी सिंह* दायर किया, जो अभी भी विचाराधीन है।
- *1998-99* में ब्लॉक से इस प्लॉट पर *2 कमरे का पक्का भवन* बना। तब रैयत ने कोई आपत्ति नहीं की।
- *2003-04* में *सर्व शिक्षा अभियान* के तहत स्कूल को *7 कमरे और किचन शेड* मिले।
2. विवाद की शुरुआत और विभाग की लापरवाही: 2004-2007
- ठेकेदारी और विवाद को लेकर रैयत *झारी सिंह* ने *सब जज कोर्ट* में *झारखंड सरकार, उपायुक्त देवघर, CO, BDO, DSE, स्कूल हेडमास्टर और सिविल सर्जन देवघर* को पक्षकार बनाकर मामला दर्ज किया।
- आरोप है कि इस दौरान *उपरोक्त सभी पदाधिकारी इस केस को लेकर काफी निष्क्रिय* रहे।
3. काम रुका, फिर शुरू हुआ, पर केस छूटा: 2004-2005
- *24/03/2004* को रैयत के वंशज *जटली देवी, पिता स्व. अर्जुन सिंह* ने DC को आवेदन दिया।
- DC के *ज्ञापांक 1233/गो. दिनांक 28/03/2004* से *काम बंद* करवा दिया गया।
- बाद में सामाजिक स्तर पर रैयतों को मनाने के बाद वे *DC के समक्ष उपस्थित* हुए और *काम पुनः शुरू* करने का आवेदन दिया।
- DC के *पत्रांक 16/गो. दिनांक 03/01/2005* के आदेश पर *काम चालू होकर पूरा* हुआ। इस बीच विभागीय स्तर पर *10-12 कमरे* और बन गए।
4. अंतिम हार और स्कूल सील: 2007-2026
- लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि *कोर्ट केस को विभागीय पदाधिकारियों ने बिल्कुल छोड़ दिया*। पैरवी नहीं हुई।
- नतीजा: *2007 में कोर्ट ने एकतरफा निर्णय रैयतों के पक्ष में* सुना दिया।
• *सिविल कोर्ट, देवघर के उसी आदेश के आलोक में रविवार 05 जुलाई 2026, को स्कूल को 'सील'* कर दिया गया.
*समीक्षा या खानापूर्ति?*
1. जिले में विधि और शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठकों में आखिर क्या होता है। क्या जमीन-जायदाद जैसे संवेदनशील मामलों की गंभीरता से समीक्षा होती है, या सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है?
2. बच्चों का क्या कसूर?
3. जिम्मेदारी किसकी?
इस लापरवाही के लिए आखिर कौन जवाबदेह है? क्या दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी, या इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार और विभाग की इस किरकिरी का जिम्मेदार कौन है, और क्या राज्य/जिला प्रशासन इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर इस विद्यालय के 350 से अधिक बच्चों की पढ़ाई के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करेगा?
स्थानीय लोगों का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि *अगर पदाधिकारी थोड़ा भी संवेदनशील रहते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता*। आज *चंदना स्कूल प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गया* है।
डीएसई ने कहा:-
*इस संबंध में देवघर के जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने 'रांची एक्सप्रेस' को बताया कि ये सही बात है कि- विभाग कोर्ट में केस हार गई हैं, 2-3 दिनों के अंदर "प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पीडीजे)," के न्यायालय में मामले की अपील दायर की जाएगी।*




