
घर से क्लासरूम तक जब बच्चों को घर से बुलाने निकल पड़े ‘जिद्दी’ गुरुजी
प्रधानाध्यापक परशुराम तिवारी की अनूठी पहल, शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण की एक मिसाल
संजय सिंह"उमेश"
पलामू : नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन जहां अन्य स्कूलों में केवल दाखिलों की गहमागहमी थी, वहीं सदर मेदिनीनगर प्रखंड के रजवाडीह मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक परशुराम तिवारी की नजर उन बच्चों पर थी, जिनके चेहरे स्कूल में नजर नहीं आ रहे थे।
बच्चों की अनुपस्थिति ने उन्हें इतना बेचैन कर दिया कि वे ऑफिस छोड़कर सीधे उनके घरों की ओर निकल पड़े।
खेत-खलिहानों में गुरुजी की दस्तक
प्रधानाध्यापक जब कक्षा आठ के छात्र अमन के घर पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला। हार मानने के बजाय उन्होंने पड़ोसियों से पूछताछ की। पता चला कि अमन अपनी मां के साथ ननिहाल गया है और उसकी दादी महुआ चुनने गई हैं।
गुरुजी सीधे महुआ के बागान पहुंच गए, जहां अमन की दादी से संवाद किया। समझाने पर दादी ने जल्द ही बच्चे को स्कूल भेजने का वादा किया।
कहीं टालमटोल, तो कहीं बीमारी का बहाना
इसके बाद वे छात्र नंद कुमार के घर पहुंचे, जहां मां ने बच्चे के घर पर न होने की बात कही और टालमटोल करती रहीं। लेकिन शिक्षक का कर्तव्य सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं था।
अगले घर में छात्र राम कुमार बुखार की स्थिति में मिला। प्रधानाध्यापक ने न केवल बच्चे को दुलारा, बल्कि उसके अभिभावकों की काउंसलिंग भी की।
रंग लाई कोशिश : लौट आई स्कूल की रौनक
गुरुजी के समझाने और शिक्षा का महत्व बताने का असर तुरंत दिखने लगा। बेबी कुमारी और माधुरी कुमारी के परिवारों ने उन्हें स्कूल भेजने की सहमति दी।
भाई-बहन हिमांशु और अंजलि कुमारी को तो प्रधानाध्यापक खुद अपने साथ स्कूल लेकर आए।
गुरुजी का संदेश
प्रधानाध्यापक परशुराम तिवारी ने कहा:
“बच्चों को स्कूल न भेजने के लिए जब बहाने बनाए जाते हैं, तो मन थोड़ा खिन्न जरूर होता है। मगर हम हार मानने वाले नहीं हैं। हर एक बच्चा स्कूल पहुंचे, इसके लिए हमारी कोशिशें बिना रुके जारी रहेंगी।”
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परशुराम तिवारी का है सपना हर बच्चे का पढ़ाई हो अरमान पूरा
पलामू जिले के चर्चित शिक्षकों में सबसे आगे नाम आता है परशुराम तिवारी का यह जरूर सरकारी शिक्षक है लेकिन इसके बावजूद भी यह दिलो जान से शिक्षा से प्रेम करते हैं और बच्चों को अच्छे शिक्षा देने का प्रयास करते हैं जो बच्चे स्कूल नहीं आते हैं उनके घरों में जाकर भी दस्तक देते हैं जिसकी प्रशंसा कई लोगों ने किया है।
पलामू के इस ‘जिद्दी’ गुरुजी के जज्बे की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है, जिन्होंने साबित कर दिया कि एक सच्चा शिक्षक सिर्फ पढ़ाता नहीं, बल्कि हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करता है।




