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एल.बी.एस.एम. कॉलेज में ‘वैश्विक परिदृश्य में युवाओं के समक्ष चुनौतियाँ एवं समाधान’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित


जमशेदपुर। लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल (एल.बी.एस.एम.) कॉलेज, जमशेदपुर में आईक्यूएसी  के तत्वावधान में ‘वैश्विक परिदृश्य में युवाओं के समक्ष चुनौतियाँ एवं समाधान’ विषय पर एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा ने की। मुख्य वक्ता के रूप में श्री सुधांशु जी एवं श्री मनोज जी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश डॉ. मौसमी पॉल ने कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. विनोद कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनय कुमार गुप्ता ने प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी में युवाओं की वर्तमान भूमिका, वैश्वीकरण से उत्पन्न चुनौतियों तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि युवा केवल अपने व्यक्तिगत भविष्य के निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि समाज, राज्य और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। वर्तमान समय में युवाओं के सामने सोशल मीडिया की लत, भ्रामक सूचनाएँ, नशे की प्रवृत्ति, नैतिक मूल्यों में कमी, बेरोजगारी, सांस्कृतिक विस्मृति और बढ़ती उपभोक्तावादी मानसिकता जैसी चुनौतियाँ हैं। इनका समाधान शिक्षा, कौशल, अनुशासन, नैतिकता और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव में निहित है।

संगोष्ठी में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, राष्ट्रध्वज तथा राष्ट्रीय नायकों के प्रति सम्मान रखने और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया। विद्यार्थियों से सार्वजनिक संपत्ति, खेल मैदानों, सड़कों, रेलवे स्टेशनों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों की रक्षा और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई।

युवाओं को सभी व्यक्तियों, व्यवसायों एवं श्रम के प्रति सम्मान रखने तथा बच्चों, बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों का आदर करने की सीख दी गई। शालीन, विनम्र एवं संयमित भाषा के प्रयोग, सत्य बोलने, ईमानदारी अपनाने, समयनिष्ठ बनने और समय से पहले अपने कार्यस्थल पर पहुँचने की आदत विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में यातायात नियमों के पालन, वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट के प्रयोग तथा नशे और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से बचने का संदेश दिया गया। भ्रष्टाचार, हिंसा, साइबर अपराध और अन्य असामाजिक गतिविधियों से दूर रहने तथा कानून एवं नियमों का पालन करने का आह्वान किया गया।

वक्ताओं ने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर बल देते हुए विद्यार्थियों से झूठी खबरों और अपुष्ट जानकारियों को साझा न करने की अपील की। जरूरतमंदों और दिव्यांगजनों की सहायता, रक्तदान, अंगदान तथा समाज सेवा के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण को युवाओं के राष्ट्रीय कर्तव्य का हिस्सा बताते हुए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, बिजली एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा सार्वजनिक स्वच्छता पर जोर दिया गया। ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।

संगोष्ठी में स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्योगों, कुटीर उद्योगों, स्थानीय कारीगरों और भारतीय कला-शिल्प को बढ़ावा देने की अपील की गई। युवाओं से अपनी मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करने तथा आयुर्वेद, योग एवं पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक पक्ष को समझने का आह्वान किया गया।

शिक्षा के संबंध में कहा गया कि शिक्षा केवल अंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कौशल, गुणवत्ता, रचनात्मकता, अनुभव आधारित शिक्षा और रोजगारपरक क्षमता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा, पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा तथा स्थानीय कला एवं शिल्प को उचित स्थान देने की आवश्यकता बताई गई।

कार्यक्रम में परिवार को संस्कारों की पहली पाठशाला बताते हुए माता-पिता, गुरु और राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता की भावना विकसित करने पर बल दिया गया। विद्यार्थियों को परिवार के साथ समय बिताने, साथ मिलकर भोजन करने, स्वाध्याय की आदत विकसित करने, प्रेरक कथाओं एवं भारतीय साहित्य का अध्ययन करने तथा त्योहारों को केवल दिखावे के बजाय उनके सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व के साथ मनाने की प्रेरणा दी गई।

स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने, मोटे अनाज को भोजन में शामिल करने, जंक फूड और अनावश्यक पैकेजिंग से बचने तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दिया गया।

संगोष्ठी के अंत में विद्यार्थियों से स्वच्छ, संस्कारी, साहसी, संवेदनशील, अनुशासित, सम्मानजनक और जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। युवा यदि सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और राष्ट्र प्रथम की भावना को अपने जीवन का आधार बनाएं, तो भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम की शुरुवात राष्ट्रीय गीत एवं समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ विजय प्रकाश, डॉ दीपांजय श्रीवास्तव, प्रो संतोष राम, प्रो विकास मुंडा, शीतल , दीपाली, प्रगति,हरप्रीत, अभिषेक, सोनू , चन्दन,एन सी सी कैडेट्स, एनएसएस सहित सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे।