झारखंड आंदोलन की खरीददार कांग्रेस कभी झारखंड का भला नहीं कर सकती: संजीव सिन्हा
जमशेदपुर। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर जमशेदपुर में कांग्रेस के प्रदर्शन पर भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन को मुद्दाविहीन राजनीति और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को गुमराह करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम का उद्देश्य खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता, पारदर्शिता और वैध खनन को बढ़ावा देना है, जिससे खनिज संपदा का बेहतर उपयोग और राज्यों के राजस्व में वृद्धि हो सके। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि यह संशोधन राज्यों के खनिज अधिकारों या राज्यों द्वारा वसूले जाने वाले मौजूदा खनिज करों को समाप्त नहीं करता है। गुरुवार को जारी बयान में संजीव सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस का यह दावा पूरी तरह भ्रामक है कि केंद्र सरकार झारखंड का खनिज राजस्व छीन रही है। केंद्र सरकार के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, वर्तमान में खनन क्षेत्र से प्राप्त कुल करों एवं वैधानिक भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को मिलता है और संशोधन के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। राज्यों को रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, डीएमएफ तथा जीएसटी में उनका हिस्सा मिलता रहेगा। इसलिए कांग्रेस द्वारा झारखंड के राजस्व अधिकारों के समाप्त होने का भय पैदा करना तथ्यों के विपरीत है। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता अधिनियम की गलत व्याख्या कर झारखंड की जनता में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस संशोधन को लेकर कहीं कोई व्यापक विरोध नहीं है और कांग्रेस शासित राज्यों में भी इसके खिलाफ कोई प्रभावी आंदोलन नहीं हो रहा है। ऐसे में झारखंड में कांग्रेस का प्रदर्शन साफ तौर पर उसकी मुद्दाविहीन और अवसरवादी राजनीति को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि संशोधन का एक प्रमुख उद्देश्य एमएमडीआर संशोधन का उद्देश्य खनिज संसाधनों के दोहन को अधिक पारदर्शी बनाना, वैध खनन को बढ़ावा देना और झारखंड को उसकी विशाल खनिज संपदा का अधिकतम लाभ दिलाना है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा झारखंड में 34 कोल ब्लॉक चालू करने की मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक केवल 4 कोल ब्लॉक ही चालू हो पाए हैं। 30 कोल ब्लॉक अब भी राज्य सरकार की अनुमति और प्रक्रिया के इंतजार में हैं। इसी प्रकार लौह अयस्क की 15 में से केवल 6 और बॉक्साइट की 37 में से मात्र 17 खदानें ही चालू हैं। यह स्थिति राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
संजीव सिन्हा ने कहा कि झारखंड में पहले से ही विभिन्न प्रकार के सेस और अतिरिक्त भार के कारण अन्य राज्यों के मुकाबले यहां का कोयला एवं लौह अयस्क महंगा हो गया है। इसकी सीधी मार उद्योगों और बाजार पर पड़ रही है एवं लागत बढ़ने से झारखंड के कोयला और लौह उत्पादों की मांग भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में कांग्रेस को राजनीति करने के बजाय राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के हित में ठोस कार्य करने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस सरकार के संरक्षण में झारखंड में कोयला, बालू, पत्थर और अन्य खनिज संपदाओं की खुली लूट का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन और खनिज माफियाओं पर कार्रवाई होने लगे तो कांग्रेस नेताओं की परेशानी समझ में आती है। अपनी अवैध कमाई और संरक्षण के तंत्र पर चोट पड़ने की आशंका से ही कांग्रेस एमएमडीआर संशोधन के नाम पर जनता को बरगलाने में जुटी है।
संजीव सिन्हा ने कहा कि राज्य में नियुक्ति परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों, महाधांधली और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है। युवा सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इन गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय एमएमडीआर के मुद्दे पर बेवजह शोर मचा रही है। उन्होंने कहा कि यह जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है, लेकिन झारखंड की जनता अब कांग्रेस और उसके सहयोगियों की इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता खनिज संपदा का संरक्षण, राज्य के राजस्व में वृद्धि, आदिवासी एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों का विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। कांग्रेस भ्रम फैलाने के जगह बताए कि पिछले 7 वर्षों में राज्य में वैध खनन, रोजगार और राजस्व बढ़ाने के लिए उसकी नीति क्या रही है।
भवदीय,
प्रेम झा





