आज 77 वाँ वन महोत्सव मना रहा है वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग झारखंड
झारखंड में वनों का प्रतिशत 29.81 है। जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। वन अग्नि सुरक्षा में झारखंड ने देश में बड़ी सफलता प्राप्त की है।वन विभाग राज्य की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों एवं आसपास रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिकतम तकनीकों का प्रभावी उपयोग कर रहा है। वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम तथा त्वरित निगरानी के लिए विभाग द्वारा अत्याधुनिक तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। यद्यपि लगभग 700 हाथी विभाग के लिए चुनौती बने हुए हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, झारखंड, श्री संजीव कुमार के मार्गदर्शन में राज्य के संरक्षित वन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक आधारित संरक्षण प्रणाली विकसित की जा रही है तथा वन एवं वन क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), झारखंड, श्री एस. आर. नटेश के नेतृत्व में वन्यजीवों की सुरक्षा, निगरानी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अनेक प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
वन विभाग द्वारा कैमरा ट्रैप, ड्रोन सर्विलांस, जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग, आधुनिक संचार प्रणाली तथा त्वरित रेस्क्यू टीमों के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही की निगरानी कर समय पर आवश्यक कार्रवाई की जाती है, जिससे वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। हाल के दिनों में ऐ आई आधारित ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया गया है अभी यह वर्तमान व्यवस्था प्रोजेक्ट टाइगर पलामू ,दलमा एवं रामगढ़ में शुरू की गई है भविष्य में इसे झारखंड के सभी जिलों में लागू किया जा रहा है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी), श्री राजीव रंजन ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। विभाग का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता के माध्यम से ऐसा तंत्र विकसित करना है, जिससे वन्यजीव सुरक्षित रहें और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों का जीवन भी सुरक्षित एवं सुगम बने।
वन विभाग स्थानीय समुदायों को जागरूक करने, त्वरित सूचना प्रणाली विकसित करने तथा इको-टूरिज्म और रोजगार को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।



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