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मधुपुर में साहित्यिक विभूतियों को जयंती पर याद किया गया


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

मधुपुर (देवघर) : स्थानीय राहुल अध्ययन केन्द्र में मंगलवार को प्रसिद्ध गजलकार दुष्यंत कुमार, लेखक डॉ. राही मासूम रज़ा, नाटककार हबीब तनवीर, हिंदी प्रेमी फादर कामिल बुल्के और लोककथाकार विजयदान देथा की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनकी तस्वीरों पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में जनवादी लेखक संघ के प्रांतीय सह सचिव धनंजय प्रसाद ने कहा कि दुष्यंत कुमार एक युग का नाम हैं, जहां से हिंदी गजल की नई शुरुआत होती है। वे गीतकार और उपन्यासकार भी थे, लेकिन सर्वाधिक ख्याति गजल में मिली। उनकी गजलों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश और व्यंग्य दिखता है और वे आम आदमी की पीड़ा का स्वर बनती हैं।

उन्होंने कहा कि डॉ. राही मासूम रज़ा प्रसिद्ध लेखक, कवि और पटकथा लेखक थे, जिन्होंने महाभारत धारावाहिक की पटकथा लिखकर ख्याति अर्जित की। हबीब तनवीर ने रंगमंच को नई दिशा दी और 'आगरा बाजार' और 'चरणदास चोर' जैसे चर्चित नाटकों से पहचान बनाई।

फादर कामिल बुल्के का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी होते हुए भी हिंदी के प्रति उनका अटूट प्रेम रहा और उन्होंने हिंदी को समृद्ध किया। वहीं विजयदान देथा ने लोककथाओं को नई पहचान दी।

वक्ताओं ने कहा कि ऐसी विभूतियों को भुलाया नहीं जा सकता और उन्हें याद करना जरूरी है। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।