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शिक्षा के रास्ते में अतिक्रमण की दीवार, कीचड़ में गिरकर ज़ख्मी हो रहे हैं छात्र


शिक्षा के रास्ते में अतिक्रमण की दीवार, कीचड़ में गिरकर ज़ख्मी हो रहे हैं छात्र

• सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां.

• प्रशासन मौन

रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 

देवघर : जिले के सारवां प्रखंड अंतर्गत बस स्टैंड (पांडेय टोला) से *प्लस टू उच्च विद्यालय व मध्य विद्यालय, सारवां* की ओर जाने वाली मुख्य सड़क का लंबे समय से खुलेआम अतिक्रमण कर व्यावसायिक उपयोग किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। 

स्थिति यह है कि पूरी सड़क पर भवन निर्माण सामग्री - मोरम, गिट्टी, बालू और ईंट का ढेर लगा दिया गया है। बरसात में यह सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई है, जिससे स्कूली बच्चों, शिक्षकों और आम राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।

प्रतिदिन बच्चे फिसल कर गिर रहे हैं और जख़्मी हो रहे हैं। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे और पानी जमा है, और दोपहिया वाहन भी निकलने में असमर्थ हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह सड़क हजारों लोगों की लाइफलाइन है। *इसी रास्ते से सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन प्लस टू विद्यालय और मध्य विद्यालय जाते हैं, साथ ही बस स्टैंड से बाजार जाने वाले लोगों का भी यही मुख्य मार्ग है,* लेकिन कुछ लोगों ने सड़क को ही अपना निजी स्टॉक यार्ड बना लिया है। न तो कोई रोक-टोक है, और न ही प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई की जाती है।


ज्ञात हो कि सड़क पर अतिक्रमण करना सीधे तौर पर गैर-कानूनी है:-

1.  झारखंड पंचायतीराज अधिनियम- 2001 के तहत सार्वजनिक सड़क, पगडंडी या रास्ते पर किसी भी प्रकार का स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण दंडनीय अपराध है। अंचल अधिकारी को अतिक्रमण हटाने की शक्ति प्राप्त है।

2.  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-285 के तहत सार्वजनिक मार्ग पर बाधा उत्पन्न करना अपराध है।

3.*सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश:* माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई मामलों में कहा है कि- *"सार्वजनिक सड़क का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फुटपाथ और सड़कें आम नागरिकों के चलने के लिए हैं, किसी के निजी व्यवसाय के लिए नहीं।"*  

*सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में भी अपने एक आदेश में सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि सड़कों और फुटपाथों से अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो।*


उल्लेखनीय है कि ऐसे मामले में अतिक्रमण हटवाने की पहली जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की है।
इसके लिए अंचल अधिकारी (CO) को सार्वजनिक जमीन और सड़क अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए संबंधित व्यक्ति/प्रतिष्ठान/कंपनी को नोटिस देकर अतिक्रमण हटवाने का अधिकार है।

ग्रामीण सड़क और बाजार क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखना प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की भी जिम्मेदारी है।

अगर निचले स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है, तो अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और उपायुक्त (DC) के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा सकता है। लेकिन *"अतिक्रमण हटाओ अभियान"* ज़्यादातर शहरी क्षेत्रों में ही चलाए जाते हैं, कभी-कभार ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ एरिया में अतिक्रमण हटवा कर खानापूर्ति कर ली जाती है।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने सारवां के अंचलाधिकारी, देवघर एसडीओ व उपायुक्त से मांग की है कि इस सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और निर्माण सामग्री को जब्त कर संबंधित लोगों पर जुर्माना लगाया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सड़क को गोदाम न बनाए। साथ ही स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यहां तत्काल मिट्टी-मोरम हटाकर आवागमन सुचारू किया जाए।