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जर्जर बिजली व्यवस्था बनी हादसों का कारण, पेड़ गिरने से 11 हजार वोल्ट की लाइन टूटी, घर क्षतिग्रस्त


छतरपुर (पलामू)। शनिवार की संध्या तेज आंधी और बारिश के दौरान जपला रोड में एक बड़ा पेड़ 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन के साथ एक मकान पर गिर गया। हादसे में मकान का अगला छज्जा क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि दो बिजली पोल टूटकर जमीन पर गिर पड़े। संयोगवश इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

यह घटना केवल जपला रोड की नहीं, बल्कि पूरे छतरपुर क्षेत्र की जर्जर बिजली व्यवस्था की हकीकत को सामने लाती है। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बिजली के पोल जर्जर हो चुके हैं तथा कई स्थानों पर तार भी खतरनाक स्थिति में हैं। कुछ देर के लिए हल्की बारिश या तेज हवा चलते ही बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है और लोग घंटों अंधेरे में रहने को विवश हो जाते हैं।

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि छतरपुर के कई मोहल्लों में आज भी 11 हजार वोल्ट के नंगे तार लोगों के घरों के ऊपर से गुजर रहे हैं। कई जगह तार इतने नीचे झूल रहे हैं कि हर समय जानलेवा हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने न तो इन तारों को बदला और न ही इन्हें सुरक्षित बनाया। बरसात और तेज हवा के दौरान ऐसे तार कभी भी किसी परिवार के लिए मौत का कारण बन सकते हैं।

लोगों का आरोप है कि जर्जर तार और पोल के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और लोगों की जान तक जा चुकी है, लेकिन बिजली विभाग की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया। सोशल मीडिया के इस दौर में भी बिजली विभाग बिजली कटौती या आपूर्ति बहाल होने की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं करता, जिससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि जनता से वोट मांगने वाले जनप्रतिनिधि भी इस गंभीर समस्या पर मौन हैं। छतरपुर की बिजली व्यवस्था वर्षों से बदहाल है, लेकिन न स्थानीय विधायक ने इसे विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाया और न ही सांसद ने केंद्र या संबंधित विभाग के समक्ष ठोस पहल की। चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जर्जर बिजली व्यवस्था, जानलेवा तार और टूटे पोल जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार, बिजली विभाग तथा क्षेत्र के विधायक और सांसद से अविलंब छतरपुर की संपूर्ण बिजली व्यवस्था का सर्वे कराकर जर्जर पोल और तार बदलने, घरों के ऊपर से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट के नंगे तारों को सुरक्षित करने, पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करने तथा बिजली आपूर्ति व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अब भी गंभीर पहल नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों की होगी।