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बच्चों की जान से खिलवाड़! अंडरपास-ओवरब्रिज नहीं,रेलवे पटरी पार कर स्कूल पहुंचने की मजबूरी


सबौना स्कूल के मासूमों पर मंडरा रहा हादसे का खतरा,बारिश में कीचड़ और जलजमाव ने बढ़ाई मुसीबत; वर्षों से समस्या,फिर भी रेलवे-प्रशासन बेखबर

पलामू :बिश्रामपुर/रेहला। एक तरफ सरकार बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा का माहौल देने का दावा करती है,वहीं गढ़वा रोड जंक्शन क्षेत्र के सबौना स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राएं आज भी जान हथेली पर रखकर रेलवे पटरी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं।विद्यालय तक पहुंचने के लिए सुरक्षित अंडरपास या ओवरब्रिज नहीं है।ऊपर से स्कूल की ओर जाने वाली कच्ची सड़क बारिश में गड्ढों,पानी और कीचड़ से लबालब हो जाती है।ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के रास्ते में हर दिन हादसे का खतरा खड़ा रहता है।सबसे गंभीर स्थिति रेलवे पटरी पार करने के दौरान उत्पन्न होती है।ट्रेन के आवागमन के बीच बच्चों को पटरी के आसपास खड़े होकर ट्रेन गुजरने का इंतजार करना पड़ता है।जरा-सी चूक या असावधानी कई परिवारों की खुशियां छीन सकती है।सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही रेलवे और प्रशासन की नींद खुलेगी?स्थानीय लोगों ने समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर डीआरएम धनबाद एवं पूर्व मध्य रेलवे धनबाद मंडल को डाक के माध्यम से आवेदन भेजा है।अस्थानी लोगों ने विद्यालय के समीप अंडरपास अथवा ओवरब्रिज निर्माण कराने और कच्ची सड़क को पक्का कराने की मांग की है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या एक-दो महीने या साल भर की नहीं,बल्कि वर्षों से चली आ रही है।इस दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष कई बार समस्या रखी गई,लेकिन आश्वासन के अलावा धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई।बारिश में सड़क की हालत और रेलवे पटरी का जोखिम दोनों मिलकर बच्चों की परेशानी दोगुनी कर देते हैं।बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी व्यवस्था की है, तो फिर उन्हें रेलवे पटरी पार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है?स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि सुरक्षित रास्ते के लिए ठोस कार्रवाई चाहिए।